अंकिता भंडारी हत्याकांड: लेफ्ट पार्टी की सीबीआई जांच की मांग, नए खुलासों से सियासत गर्म

अंकिता भंडारी हत्याकांड में हो रहे नए दावों को लेकर अब सियासत गर्म है। लेफ्ट...

Dec 24, 2025 - 09:53
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अंकिता भंडारी हत्याकांड: लेफ्ट पार्टी की सीबीआई जांच की मांग, नए खुलासों से सियासत गर्म

अंकिता भंडारी हत्याकांड: लेफ्ट पार्टी की सीबीआई जांच की मांग, नए खुलासों से सियासत गर्म

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कम शब्दों में कहें तो अंकिता भंडारी हत्याकांड में नए खुलासों ने सियासत को गर्म कर दिया है। लेफ्ट पार्टी ने इस केस की सीबीआई जांच की मांग की है, जिसके पीछे कई गंभीर आरोप लग रहे हैं।

अंकिता भंडारी के हत्या के मामले में नए विवाद उठ रहे हैं। लेफ्ट नेताओं, विशेष रूप से इंद्रेश मैखुरी, ने भाजपा के अंदर से उठे नए सनसनीखेज खुलासों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि ये खुलासे बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाले हैं। मैखुरी ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता उर्मिला सनावर ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम का नाम लिया है। ऐसे में, भाजपा की चुप्पी इस बात का संकेत देती है कि उनके पक्ष में कुछ स्पष्ट नहीं है, और हो सकता है कि इस मामले में कुछ गंभीरता हो। अंकिता भंडारी

इंद्रेश मैखुरी ने कहा, "उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) इस मामले में प्रमुख वीआईपी व्यक्तियों का नाम उजागर करने में नाकाम रही है। उन्हें राजनीतिक दबाव के कारण यह करने में मुश्किल आ रही है।" उन्होंने मांग की है कि इस केस की जांच उच्चतम न्यायालय के अधीन किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

दिलचस्प बात यह है कि जब भी इस मामले में वीआईपी का नाम लिया गया, वह अक्सर भाजपा के दायरे में ही रहा है। हालाँकि, इस बार आरोप लगाने वाले भी भाजपा के हैं, और उनके ऊपर आरोप भी भाजपा के प्रमुख नेताओं के हैं। इस संदर्भ में, यह स्पष्ट होता है कि भाजपा का असली चेहरा सामने आ रहा है।

कामरेड मैखुरी ने आगे कहा कि यह शर्मनाक है कि राजनीतिक दलों के बीच सत्ता की होड़ और विवादों की वजह से आम जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का नारा देने वाली भाजपा खुद ही इस मामले में लड़कियों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।

इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बातें यह हैं कि अंकिता भंडारी जैसे मामलों में जो गंदगी और राजनीतिक घालमेल देखने को मिल रहा है, इससे यह साफ होता है कि भाजपा ने उत्तराखंड की 25 सालों में क्या हालत कर दी है।

अंकिता भंडारी केस में नए खुलासों ने न केवल राजनीतिक गर्मागर्मी पैदा की है बल्कि यह भी दिखा दिया कि कैसे चुनावी वादों और वास्तविकता के बीच एक पेचीदा खेल चलता है। इस मामले में सीबीआई जांच की मांग के पीछे वामदलों की सक्रियता को देखते हुए लगता है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गंभीर मोड़ ले सकता है।

इस संदर्भ में, यह जरूरी है कि सभी पक्ष जांच को लेकर गंभीरता से सोचें और बिना किसी भेदभाव के मामले को सुलझाने की कोशिशें करें। इस मामले की गहनता से जांच जरूरी है ताकि न्याय हो सके और दोषियों को सजा मिल सके।

इस घटना पर नवीनतम अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें। अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

सादर, टीम PWC न्यूज़

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