उपनल कर्मियों के आंदोलन में लेफ्ट का समर्थन, नियमितीकरण की मांग तेज
नियमितीकरण के लिए चल रहे उपनल कर्मियों के आंदोलन का भाकपा (माले) समर्थन किया है।...
उपनल कर्मियों के आंदोलन में लेफ्ट का समर्थन, नियमितीकरण की मांग तेज
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कम शब्दों में कहें तो, उपनल कर्मियों के आंदोलन को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने समर्थन दिया है। यह आंदोलन उत्तराखंड सरकार की नीति के खिलाफ है, जहां उपनल कर्मियों के लिए नियमितीकरण की मांग तेज़ी से उठ रही है।
उपनल कर्मचारियों के इस आंदोलन को लेकर भाकपा (माले) ने गंभीरता से आवाज उठाई है और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा आंदोलनरत कर्मियों के खिलाफ नो वर्क- नो पे का आदेश जारी किया गया है, जो अत्यंत निंदनीय है। पार्टी ने ऐसे आदेशों को श्रमिकों के अधिकारों का हनन मानते हुए तीव्र विरोध किया है।
न्यायालय के फैसले का समर्थन
उपनल कर्मियों के नियमितीकरण के पक्ष में उत्तराखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के कई महत्वपूर्ण फैसले भी हैं। 2018 में हुए कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड सरकार के मामले में, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्य सरकार उपनल कर्मियों को उचित पे स्केल और महंगाई भत्ता दे। अदालत ने यह भी निर्दिष्ट किया था कि सरकार को एक वर्ष के भीतर उपनल के जरिए नियुक्त सभी कर्मचारियों का नियमितीकरण करना चाहिए। हालांकि, जब राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय गई, तो सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा।
सरकार के दमनकारी आदेशों के खिलाफ उठी आवाज़
भाकपा (माले) ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड सरकार न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर रही है और उपनल कर्मियों का नियमितीकरण करने में किसी भी तरह की तत्परता नहीं दिखा रही है। इसके बजाय, जब उपनल कर्मी अपनी मांगों के लिए आंदोलन करते हैं, तो उनके खिलाफ नो वर्क- नो पे का आदेश जारी किया जाता है, जो अत्यधिक अन्यायपूर्ण है।
पार्टी ने कहा है कि उपनल कर्मियों का यह उत्पीड़न बर्दाश्त के बाहर है और उत्तराखंड सरकार को इसे तुरंत समाप्त करना चाहिए। न्यायालयों के निर्देशों का सम्मान करते हुए सरकार को उपनल कर्मियों का नियमितीकरण करना चाहिए। इसके अलावा, समान काम के लिए समान वेतन की नीति को लागू करना अनिवार्य है।
नियमित नियुक्तियों की मांग
भाकपा (माले) द्वारा यह भी कहा गया है कि आउटसोर्सिंग, ठेका प्रथा और अन्य अनियमित नियुक्तियों की स्थिति को खत्म करना चाहिए और पारदर्शिता के साथ स्थायी और नियमित नियुक्तियों का पालन किया जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए ताकि उन्हें बेहतर रोजगार संबंधी सुरक्षा प्राप्त हो सके।
सरकार और विपक्ष दोनों को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और उपनल कर्मियों की स्थिति को सुधारने हेतु ठोस कदम उठाने चाहिए। यह केवल उपनल कर्मियों की नहीं, बल्कि सभी श्रमिकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं और शासन पर दबाव डालें।
अंत में, यह ध्यान रखना चाहिए कि श्रमिक वर्ग की एकता और संघर्ष ही उन्हें उनके अधिकार दिला सकता है। उपनल कर्मियों ने अपनी जायज मांगों को लेकर जो आंदोलन खड़ा किया है, उसके प्रति सच्ची एकता और सहानुभूति की आवश्यकता है।
इस जानकारी के साथ विश्वसनीयता हासिल करते हुए, हम सभी को एकजुट होकर ऐसी नीतियों का विरोध करना चाहिए जो श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
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संकेत: यह लेख टीम PWC News की ओर से नीता शर्मा द्वारा लिखा गया है।
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