केंद्र सरकार ने संचार साथी ऐप को अनिवार्य करने का आदेश वापस लिया: जानिए क्यों

संचार साथी ऐप को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसे सभी नए स्मार्टफोन्स में अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने का आदेश वापस ले लिया है। पहले सरकार ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल फ्रॉड रोकने के उद्देश्‍य से इस ऐप को अनिवार्य किया था, लेकिन […] The post केंद्र सरकार ने वापस लिया संचार साथी ऐप को अनिवार्य करने का आदेश appeared first on Khabar Sansar News.

Dec 4, 2025 - 09:53
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केंद्र सरकार ने संचार साथी ऐप को अनिवार्य करने का आदेश वापस लिया: जानिए क्यों

केंद्र सरकार ने संचार साथी ऐप को अनिवार्य करने का आदेश वापस लिया: जानिए क्यों

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कम शब्दों में कहें तो, केंद्र सरकार ने संचार साथी ऐप को सभी नए स्मार्टफोन्स में अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने का आदेश वापस ले लिया है। यह फैसला राजनीतिक विवादों में आने के बाद किया गया है। सरकार ने पहले इस ऐप को साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी बताते हुए अनिवार्य किया था।

संचार साथी ऐप का महत्व और विवाद

संचार साथी ऐप को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सरकार का यह निर्णय कई सवाल खड़े करता है। पहले यह ऐप डिजिटल फ्रॉड और साइबर क्राइम से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से अनिवार्य किया गया था। लेकिन अब इसे स्वैच्छिक करने का निर्णय अब इस बात को दर्शाता है कि जनता और राजनैतिक दलों के दबाव के कारण सरकार को अपने फैसले को बदलना पड़ा।


फ्रॉड रोकने के लिए पहल

सरकार का दावा है कि संचार साथी ऐप की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। इसके उद्देश्य से यूजर्स को सुरक्षा प्रदान करना था, ताकि वे संभावित फ्रॉड से सुरक्षित रहें। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में लगभग 6 लाख लोगों ने इस ऐप के लिए रजिस्ट्रेशन कराया, जो कि पहले की तुलना में 10 गुना अधिक है। अब तक लगभग 1.4 करोड़ यूजर्स इस ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं और रोजाना करीब 2000 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हो रही हैं।


कांग्रेस का निजता पर सवाल

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने राज्यसभा में इस ऐप की कई विशेषताओं को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह ऐप यूजर्स की रीयल-टाइम लोकेशन, सर्च हिस्ट्री और वित्तीय लेनदेन पर नजर रख सकता है। यह चिंता उनके द्वारा उठाए गए सवालों का मुख्य विषय बन गई। 28 नवंबर को केंद्र के आदेश पर भी सवाल उठाए गए, जिसमें कहा गया था कि मोबाइल कंपनियों को इस ऐप को प्री-इंस्टॉल करना होगा।


सरकार की सफाई और जासूसी का खंडन

इस बीच, लोकसभा में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह स्पष्ट किया कि संचार साथी ऐप का उपयोग जासूसी के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देना है, न कि निगरानी करना। सिंधिया ने बताया कि जनता की राय को प्राथमिकता दी जाएगी और इस ऐप पर आने वाले समय में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।


सरकार द्वारा इस ऐप को अनिवार्य करने के निर्णय को फिर से विचार में लेने के बाद, यह स्पष्ट है कि डिजिटल नीति के प्रति सभी पक्षों के दृष्टिकोण को समेकित किया जाना बेहद आवश्यक है। इस निर्णय के पीछे का तर्क केवल साइबर सुरक्षा नहीं, बल्कि लोगों की निजता और उनकी चिंताओं का भी ध्यान रखना है।

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जानिए इस निर्णय ने क्या-क्या असर डाला है और आगे की राह क्या होगी।

साथ ही, हमें याद रखना चाहिए कि तकनीकी विकास के साथ हमें सुरक्षा और निजता दोनों के बीच सही संतुलन बनाए रखना होगा।

संचार साथी ऐप के वापस लिए गए आदेश से जुड़ी जानकारी और अन्य समाचारों के लिए, सभी अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

टीम PWC News - स्नेहा शर्मा

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