टनकपुर के गांधी मैदान में उत्साह से प्रारंभ हुआ दो दिनी उत्तरायणी मेला
महिलाओं ने परंपरागत रंग्याली पिछौड़ी पहनकर शारदा नदी से निकाली कलश यात्रा टनकपुर/चम्पावत। हरेला क्लब की ओर से आयोजित दो
टनकपुर में धूमधाम से मनाया जा रहा उत्तरायणी मेला
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कम शब्दों में कहें तो, टनकपुर में उत्तरायणी मेले की शुरुआत हुई है, जिसमें स्थानीय महिलाएं और बच्चे हिस्सा ले रहे हैं।
टनकपुर/चम्पावत: हरेला क्लब द्वारा आयोजित होने वाला दो दिनी उत्तरायणी मेला बुधवार को रंगारंग कार्यक्रम के साथ प्रारंभ हुआ। इस मेले में महिलाओं ने पारंपरिक रंग्याली पिछौड़ी पहनकर शारदा नदी से जल लेकर कलश यात्रा निकाली। यह यात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी, जिसका आयोजन स्थानीय संस्कृति और परंपरा को मान्यता देने के उद्देश्य से किया गया है।
कलश यात्रा का आकर्षण
महिलाओं की कलश यात्रा में बच्चे भी शामिल हुए, जो छोलिया नृत्य कर रहे थे। यह नृत्य उत्तराखंड के पूर्वी हिस्से की खास परंपरा है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक भी जुटे। जैसे ही यह यात्रा गांधी मैदान में पहुंची, वहां का माहौल जीवंत हो गया। स्थानीय लोग और पर्यटन प्रेमी इस कलश यात्रा का आनंद लेने के लिए एकत्रित हुए।
उत्तरायणी मेले का महत्व
उत्तरायणी मेला न केवल सांस्कृतिक उत्सव है बल्कि यह क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं और कला को प्रदर्शित करता है। इस आयोजन से स्थानीय हस्तशिल्प, खाद्य सांस्कृतिक विशेषताओं और लोक कला को बढ़ावा मिलता है। हरेला क्लब की ओर से इस कार्यक्रम को आयोजित किया जा रहा है, जो स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
मेले में कई स्थानीय खेल, नृत्य और संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। यह गतिविधियाँ न केवल मनोरंजन का साधन हैं बल्कि समुदाय में सद्भावना और सहयोग को भी बढ़ावा देती हैं। बच्चों को इस मेले में विशेष रूप से भागीदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ताकि वे अपनी परंपराओं से जुड़ सकें।
समापन समारोह और भविष्य की योजनाएँ
नोकरशाही और स्थानीय प्राधिकरणों की मदद से इस मेले के समापन समारोह का आयोजन भी बड़ा करने की योजना है। आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मेले की सभी गतिविधियों और अद्भुत सांस्कृतिक प्रदर्शनों का आनंद उठाने के लिए सभी से अनुरोध है कि वे इस आनंद के सफर का हिस्सा बनें। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी धरोहर को सुरक्षित रख सकते हैं और उसे आने वाली पीढ़ियों को भी सौंप सकते हैं।
इसके अलावा, इस मेले से जुड़े सभी अपडेट के लिए कृपया हमारे समाचार पोर्टल पर बने रहें। PWC News पर और भी विशेष जानकारियाँ उपलब्ध हैं।
यह कार्यक्रम क्षेत्र में सांस्कृतिक समृद्धिका और ग्रामीण जीवन के महत्व को दर्शाता है, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है।
संपर्क: टीम PWC News, प्रियंका शर्मा
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