डीएम मनीष कुमार ने नेपाल सीमा के गाँव सील-बरुड़ी में सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, 16 किमी की पैदल यात्रा की
जन चौपाल और रात्रि चौपाल में विकास योजनाओं की समीक्षा, सड़क निर्माण समेत कई समस्याओं के समाधान के दिए निर्देश
नेपाल सीमा के गांव सील-बरुड़ी पहुंचे डीएम मनीष कुमार
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कम शब्दों में कहें तो, जिलाधिकारी मनीष कुमार ने नेपाल सीमा से सटे दुर्गम गांव सील-बरुड़ी में ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और विकास योजनाओं की समीक्षा की।
प्रदेश के चम्पावत जिले में, शनिवार को जिलाधिकारी मनीष कुमार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार संचालन में आ रहे 'जन-जन की सरकार, सेवा पखवाड़ा' अभियान के तहत, विकासखंड बाराकोट के दुर्गम गांव सील-बरुड़ी का दौरा किया। यह यात्रा उनकी मेहनत और पीड़ित ग्रामीणों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है।
कठिनाईयों के बीच 16 किमी की यात्रा
डीएम मनीष कुमार ने लगभग 15 से 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर इस दूरस्थ गांव तक पहुंचने का साहस दिखाया। कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करके पहुंचने के बाद, उन्होंने गांव के लोगों के मुद्दों को सुनने का प्रयास किया। यह उनके संकल्प को दर्शाता है कि वे वास्तव में जनता की समस्याओं को समझकर उनका समाधान चाह रहे हैं।
जन चौपाल एवं रात्रि चौपाल के माध्यम से विकास की समीक्षा
डीएम ने जन चौपाल और रात्रि चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों के समक्ष कई विकास योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने सड़क निर्माण व अन्य मुद्दों पर ध्यान देने का निर्देश दिया। उनकी पहल से ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं साझा कीं, जैसे कि बिजली, पानी, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी।
ग्रामीणों का समर्थन
डीएम मनीष कुमार के इस प्रशंसनीय प्रयास से ग्रामीणों में अनुकूलता का माहौल बना है और उन्होंने डीएम को धन्यवाद दिया। यह कदम सरकारी उपलब्धियों की सच्ची तस्वीर पेश करता है, जहां अधिकारी आम जनता के मुद्दों को सुनने के लिए सक्रियता से आगे बढ़ रहे हैं।
समाज सेवा में संकल्प
इस दौरे के दौरान, जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उनका दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास, यह दर्शाता है कि मौजूदा सरकार गांवों के विकास एवं कल्याण के लिये गंभीर है। इस अभियान के द्वारा गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास संभव हो सकेगा।
निष्कर्ष
डीएम मनीष कुमार की इस यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि सरकार की नींव गांवों की समस्याओं को सुनने और उन्हें हल करने में है। पहाड़ी क्षेत्रों में विकास योजनाओं का कार्यान्वयन और ग्रामीणों के विश्वास को प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है।
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संपादित: स्नेहा गुप्ता, टीम PWC News
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