दिल्ली में आतंकी धमाका: पाकिस्तान और तुर्की के तार जुड़े, जानिए पूरी सच्चाई

दिल्ली में हुए आतंकी धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस धमाके के तार अब पाकिस्तान और तुर्की से जुड़ रहे हैं। मुख्य आरोपी उमर नबी अपने तुर्की हैंडलर “उकासा” के संपर्क में था और दोनों सेशन ऐप के जरिए लगातार बातचीत कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक उमर […] The post दिल्ली धमाके के पीछे कौन-सा देश? जांच में खुला चौंकाने वाला सच appeared first on Khabar Sansar News.

Nov 14, 2025 - 00:53
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दिल्ली में आतंकी धमाका: पाकिस्तान और तुर्की के तार जुड़े, जानिए पूरी सच्चाई

दिल्ली में आतंकी धमाका: पाकिस्तान और तुर्की के तार जुड़े, जानिए पूरी सच्चाई

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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली में हुआ आतंकी धमाका एक बार फिर से सुरक्षा एजेंसियों के सामने जांच के नए सवाल खड़े कर रहा है। मुख्य आरोपी उमर नबी का संबंध पाकिस्तान और तुर्की से जोड़ा जा रहा है।

दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकी धमाके की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस धमाके की साजिश पाकिस्तान और तुर्की के आतंकी संगठनों द्वारा रची गई है। मुख्य आरोपी उमर नबी का सीधे तौर पर संपर्क तुर्की के हैंडलर “उकासा” से था, और दोनों के बीच संवाद एन्क्रिप्टेड सेशन ऐप के माध्यम से लगातार हो रहा था। यह बात जांच में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि कैसे आतंकवादी संगठन डिजिटल टूल्स का उपयोग कर रहे हैं।

उमर नबी की यात्रा और कट्टरपंथी नेटवर्क

जांच से यह भी जानकारी मिली है कि उमर नबी के साथ फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल का आतंकी मुजमिल भी 2022 में भारत से तुर्की गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने खुलासा किया कि इसी दौरान उमर और उसके साथी जैश-ए-मोहम्मद जैसे आंतकी संगठनों से जुड़े और कट्टरपंथी बने। यह दर्शाता है कि कैसे युवा भारत में तुरंत धार्मिक उग्रवाद के प्रति आकर्षित होते हैं और किस प्रकार ये संगठन उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं।

एन्क्रिप्टेड ऐप पर गुप्त संचार

जांच एजेंसियां अब इस एन्क्रिप्टेड सेशन ऐप पर हुई बातचीत की गहरी छानबीन कर रही हैं। कार विस्फोट की घटना जो लाल किला के पास हुई, उसमें 12 लोगों की मौत हुई और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि धमाके की साजिश तुर्की में ही रची गई थी, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती पेश करती है।

मुंबई हमले जैसी बड़ी साजिश का संदेह

सूत्रों के अनुसार, संदिग्धों की योजना दिवाली के दौरान दिल्ली के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में 26/11 जैसी बड़ी घटना को अंजाम देना था। जांच में दो टेलीग्राम ग्रुप्स का भी पता चला है, जिनमें से एक का संबंध पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी उमर बिन खत्ताब से जुड़ा है। यह चिंता का विषय है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि ये संगठन अभी भी सक्रिय हैं और भारत को निशाना बना सकते हैं।

फर्जी दस्तावेजों से खरीदी गई कार

पुलिस ने फरीदाबाद में उमर नबी के नाम पर रजिस्टर्ड लाल फोर्ड इकोस्पोर्ट कार जब्त की है। जांच में सामने आया कि इसका दिल्ली के न्यू सीलमपुर वाला पता फर्जी था। प्रारंभिक रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि कार खरीदने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि किस प्रकार आतंकी संगठन भारत में अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए फर्जी धांधलियों का सहारा ले सकते हैं।

बम विस्फोट से पहले की गतिविधियाँ

जांच में यह भी सामने आया कि विस्फोट से पहले उमर नबी रामलीला मैदान के पास एक मस्जिद गया था, जहां से उसके आतंकी गतिविधियों से जुड़े सुराग मिले हैं। इस जानकारी से यह सिद्ध होता है कि ऐसे आतंकी समूह अति-संवेदनशील स्थानों का चुनाव करते हैं ताकि अधिक से अधिक नुकसान पहुंचा सकें। ऐसे साक्ष्यों की जांच से आतंकी नेटवर्क का विनाश करना और भी आसान हो सकता है।

इस घटनाक्रम से जुड़े कई अन्य पहलुओं पर जांच जारी है। भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक नई चुनौती है। आतंकवाद के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए हमें सतर्क रहना होगा और एक साथ मिलकर इसका मुकाबला करना होगा।

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यह लेख टीम PWC न्यूज़ द्वारा लिखा गया है।

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