दिल्ली में फला उत्तरायणी महोत्सव, देवभूमि उत्तराखंड की सम्पूर्ण सांस्कृतिक विरासत की अनूठी परिकल्पना

दिल्ली के दिल सेंट्रल पार्क, राजीव चौक, कनॉट प्लेस में आयोजित राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव 2026...

Jan 16, 2026 - 09:53
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दिल्ली में फला उत्तरायणी महोत्सव, देवभूमि उत्तराखंड की सम्पूर्ण सांस्कृतिक विरासत की अनूठी परिकल्पना

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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली के सेंट्रल पार्क, राजीव चौक और कनॉट प्लेस में आयोजित राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव 2026 ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। यह महोत्सव 14 जनवरी को समापन के साथ ही अपनी गूंज छोड़ गया है।

राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव 2026, जो कि 2005 से निरंतर चल रहा उत्तरायणी अभियान का हिस्सा है, इस वर्ष ऐतिहासिक रूप में आयोजित हुआ। इस आयोजन ने उत्तराखंड की संस्कृति को ना केवल राजधानी दिल्ली में बल्कि देशभर में एक नई पहचान दी। इस महोत्सव में दर्शकों ने बरसों से दबाए गए सांस्कृतिक उत्साह में भाग लिया और इसे एक नया जीवन दिया। उत्तरायणी महोत्सव

यह महोत्सव पर्वतीय लोक विकास समिति और सुखी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। इसमें प्रोफेसर सूर्य प्रकाश सेमवाल जी ने मंच संचालन किया, जबकि राजेश्वर पैन्यूली ने कार्यक्रम की संकल्पना और राजनीतिक समन्वय में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों के कारण विभिन्न राजनीतिक प्रतिनिधियों की सहभागिता इस मंच पर सुनिश्चित हुई।

मुख्य अतिथियों के रूप में गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी, दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने कार्यक्रम में भाग लिया। इन नेताओं ने उत्तरायणी महोत्सव को उत्तराखंड की संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों को और बड़े स्तर पर आयोजित करने का संकल्प लिया।

महोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण पौराणिक नाट्य-रूपांतरण “पांडव कथा – चक्रव्यूह” था। इस अद्भुत नाट्य प्रस्तुति में महाभारत के युद्ध के तेरहवें दिन वीर अभिमन्यु के चक्रव्यूह में प्रवेश और उसके संघर्ष की घटनाओं को अद्वितीय ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसे डॉ. राकेश भट्ट जी की देखरेख में 30 से अधिक कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुत किया।

इसके अलावा, मां नन्दा देवी की डोली यात्रा और विभिन्न राज्यों से आई मातृशक्ति द्वारा प्रस्तुत लोकनृत्य व लोकगीतों ने पूरे माहौल को और भी भव्यता प्रदान की। इस महोत्सव में सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रनिर्माण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।

दिल्ली की सेंट्रल पार्क, राजीव चौक और कनॉट प्लेस में इस महोत्सव में हजारों दर्शकों ने भाग लिया और पूरे दिन सांस्कृतिक उल्लास का माहौल बना रहा। कार्यक्रम के समापन पर सभी राजनीतिक प्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि इस महोत्सव को आगे बढ़ाने और इसे और अधिक व्यापक और समावेशी स्वरूप देने का प्रयास जारी रहेगा।

ऐसे आयोजन न केवल उत्तराखंड की संस्कृति को उजागर करते हैं, बल्कि वे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को भी बढ़ावा देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि इन आयोजनों ने युवा पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का कार्य किया है। इसके जरिए हम अपने अतीत की पहचान के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को भी देख सकते हैं।

अब यह आवश्यक है कि हम ऐसे महोत्सवों का समर्थन करें और भविष्य के आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लें। हम सभी को एकजुट होना चाहिए ताकि हमारी संस्कृति और विरासत को सहेजा जा सके।

सभी आयोजकों, कलाकारों, स्वयंसेवकों और सहयोगी संगठनों का धन्यवाद करते हुए, यह महोत्सव समाप्त हुआ, लेकिन इसकी गूंज में संवेदनशीलताओं और सांस्कृतिक समर्पण की कहानी जीवित रहेगी।

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सादर, टीम PWC न्यूज - राधिका शर्मा

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