पत्रकार प्रेस परिषद में विद्रोह, अशोक गुलाटी के समर्थन में इस्तीफों की बाढ़, राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भारी नाराजगी
पत्रकार प्रेस परिषद के भीतर चल रही खींचतान अब एक बड़े विद्रोह में बदल गई...
पत्रकार प्रेस परिषद में विद्रोह, अशोक गुलाटी के समर्थन में इस्तीफों की बाढ़, राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भारी नाराजगी
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कम शब्दों में कहें तो: पत्रकार प्रेस परिषद के भीतर चल रही खींचतान अब एक बड़े विद्रोह में तब्दील हो गई है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष आसिफ अली के मनमाने रवैये के खिलाफ इस्तीफे दिए हैं।
पत्रकार प्रेस परिषद में गरमागरम बहस और अविश्वास के माहौल के बीच स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार अशोक गुलाटी के समर्थकों ने समाज के दो महत्वपूर्ण राज्यों उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से कई सदस्य आपस में मिलकर एक सशक्त विद्रोह की शुरुआत की है। अधिकतर पदाधिकारी अब संगठन के खिलाफ खड़े होकर सामूहिक इस्तीफे देने का मन बना चुके हैं, जो कि स्थिति को और भी जटिल बना रहा है।
अशोक गुलाटी ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण पदों से त्यागपत्र देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की कार्यशैली ने संगठन की सभी नैतिकता को समाप्त कर दिया है। यह टिकट के लिए एक तानाशाहीपूर्ण रवैया है, जिससे संगठन की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे जल्द ही एक नए संगठन की घोषणा करेंगे, जो पत्रकारों की सम्मान और उनके हितों के लिए काम करेगा।
मुख्य कार्यक्रमों और इस्तीफों का सिलसिला
रूद्रपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इस सामूहिक विद्रोह का अगला चरण देखा गया। प्रदेश महामंत्री जगदीश चंद्र, वरिष्ठ उपाध्यक्ष परम पाल सुखीजा और अन्य जिलाध्यक्षों ने एक सुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष आसिफ अली के खिलाफ जमकर आवाज उठाई। इस बैठक में जबरदस्त विरोध की गूंज सुनाई दी और इस दौरान कई पत्रकारों ने सामूहिक इस्तीफे दिए।
अशोक गुलाटी ने इस बैठक में कहा, "अब संगठन केवल पत्रकारों के हितों के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रहा है।" इस बयान के बाद, उन्होंने संगठन की बागडोर अपने हाथों में लेने का भरोसा दिलाया और पत्रकारों से एकजुट होने की अपील की।
अशोक गुलाटी के साथ ही इस्तीफा देने वालों में उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों का नाम शामिल था। इनमें एडवोकेट शैलेंद्र नगाइच, यासीन अंसारी, और कई अन्य स्थानीय नेता शामिल थे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष की विफल बैठक
इसके विपरीत, खटीमा में आयोजित एक बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष आसिफ अली को गिने-चुने ही सदस्यों के बीच देखना पड़ा। यह कार्यक्रम पूरी तरह से विफल रहा, जहां अधिकांश पत्रकार सदस्य उपस्थित नहीं हुए। इस स्थिति ने संगठनों के भीतर अनियमितताओं को और भी उजागर किया है।
संगठन के अंतर्गत हो रही यह गतिविधियाँ न केवल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बल्कि पूरे देश में पत्रकारिता को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। समाचारों के बीच इस विद्रोह के पीछे छिपे कारणों पर विचार किया जाना चाहिए ताकि पत्रकारों के हितों की रक्षा की जा सके।
निष्कर्ष
पत्रकार प्रेस परिषद का यह विद्रोह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि मीडिया संगठन अब केवल पत्रकारों की आवाज नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए काम कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकारों की एकजुटता नए संभावित संगठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इन घटनाक्रमों को देखते हुए, पत्रकारों को मिलकर आगे बढ़ने और अपने हितों के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही, यह संगठन के भीतर की स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। शायद हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि पत्रकारिता स्वतंत्रता और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
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प्रस्तुतकर्ता: स्वाति शर्मा, टीम PWC News
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