बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तैयारी!

खबर संसार हल्द्वानी.बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले की सुनवाई नजदीक,प्रशासन चौकस,दस दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अदालत में होनी है। ऐसा बताया जा रहा है कि सीजेआई इस दिन इस मामले में अपना फैसला सुना सकते है। पिछली 2 दिसंबर की तारीख के दिन भर एसआईआर […] The post बनभूलपुरा रेलवे जमीन को लेकर ताज़ा अपडेट! appeared first on Khabar Sansar News.

Dec 7, 2025 - 09:53
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बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तैयारी!

बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तैयारी!

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कम शब्दों में कहें तो, हल्द्वानी में बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले की सुनवाई 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है, जहां चीफ जस्टिस द्वारा फैसला सुनाया जा सकता है।

हल्द्वानी रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले का विस्तृत घटनाक्रम

इस समय बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले की सुनवाई बेहद नजदीक है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई चीफ जस्टिस की अदालत में होने जा रही है। पिछली सुनवाई 2 दिसंबर को हुई थी, जो कि लंबी खींच जाने के कारण टल गई। प्रशासन ने इस दिन के लिए सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें की हैं।

याचिका दायर करने वालों के तर्क

याचिका में उन निवासियों ने मुख्यत: यह दलीलें दी हैं कि वे दशकों से उस भूमि पर निवास कर रहे हैं, जिसमें कुछ परिवारों ने आजादी से पहले से ही अधिकार स्थापित कर लिया है। स्थानीय प्रशासन की रिकॉर्ड में इनकी पहचान दर्ज है, और इन्होंने लंबे समय तक टैक्स/भाड़ा भी दिया है। याचिका में यह भी बताया गया है कि खाली करने का आदेश बिना उचित पुनर्वास योजना के नहीं होना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जिनका अधिकार सामाजिक-मानवीय आधार पर है, उन्हें बिना उचित व्यवस्था के बेदखल नहीं किया जाना चाहिए। 2023 में उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया था, लेकिन अदालत ने बिजली से प्रशासन की ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी।

नवीनतम आदेश और पुनर्वास योजना

सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई 2024 को महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को बेदखल करने से पहले पुनर्वास योजना बनाई जाए। कोर्ट ने निर्देशित किया है कि इस भूमि के संबंध में रेलवे को आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करनी चाहिए कि कितना क्षेत्र खाली किया जाना चाहिए, कौन से परिवार प्रभावित होंगे और उन्हें कहाँ पुनर्वास दिया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार, केंद्र और रेलवे को मिलकर इस हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उचित योजना बनाने के लिए कहा गया है। लेकिन रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उनके पास अतिक्रमणकारियों के पुनर्वास या मुआवजे की कोई नीति नहीं है।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा

अब तक, मामला अदालत में लंबित है। मीडिया रिपोर्ट्स अनुमानित कर रही हैं कि 2025 में भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी होगी। इसका मतलब है कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है कि कार्रवाई होगी या नहीं। वर्तमान में, पुनर्वास और संभावित सुविधाओं का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी बताते हैं कि इससे पहले भी हाईकोर्ट द्वारा कई आदेश दिए गए थे, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। वर्ष 2007 में भी हाईकोर्ट ने इसी तरह के आदेश पारित किए थे। लेकिन प्रशासन ने उचित कार्रवाई नहीं की।

इस बार शपथ पत्र प्रस्तुत करने के बावजूद न्यायालय ने कब्ज़ा हटाने का निर्देश दिया। मामले की जटिलताएं इसे और अधिक संवेदनशील बना रही हैं। 10 दिसंबर को होने वाली आगामी सुनवाई इस मामले का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

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सभी जानकारी समझने के बाद, इस मामले का निपटारा कैसे होता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फलक की न्यायालयीन कार्रवाई का असर सीधे प्रभावित लोगों पर पड़ेगा और उनके भविष्य को निर्धारित करेगा।

सादर,
टीम PWC News
स्वाती वर्मा

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