सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों मामले में ऐतिहासिक निर्णय!
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आवारा कुत्तों के मामले (Stray Dogs Matter) में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने की मांग की थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस […] The post आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला! appeared first on Khabar Sansar News.
आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला!
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने आवारा कुत्तों के मामले (Stray Dogs Matter) में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को अदालत में भौतिक रूप से उपस्थित होने से छूट देने की मांग की थी।
कम शब्दों में कहें तो, भारत की सर्वोच्च अदालत ने इस गंभीर मुद्दे पर पुनः अपनी सख्ती दिखाई है, जिससे यह स्पष्ट है कि सरकारी अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - PWC News
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह स्पष्ट किया कि प्रमुख सचिवों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना अनिवार्य है। बेंच ने राज्यों द्वारा कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
अनुपालन न करने वालों से कोर्ट खुद निपटेगी
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह दुखद है कि अदालत को ऐसे मुद्दों पर समय बर्बाद करना पड़ रहा है, जिन्हें वर्षों पहले ही नगर निगमों और राज्य सरकारों को सुलझा लेना चाहिए था। उन्होंने कहा, “संसद नियम बनाती है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। हम अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहते हैं, लेकिन अधिकारी सोए रहते हैं। न्यायालय के आदेशों का कोई सम्मान नहीं!”
कोर्ट की कार्यवाही का महत्व
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी उल्लेख किया कि सभी राज्यों ने अंततः अनुपालन हलफनामे दाखिल कर दिए हैं, लेकिन अदालत ने कहा कि यह स्वयं सत्यापित करेगी। इस स्थिति में, अदालत की जवाबदेही बढ़ रही है, और यह अत्यधिक आवश्यक है कि सभी अधिकारी अपने दायित्वों को समझें।
27 अक्टूबर को पेशी का आदेश
यह उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को पशु जन्म नियंत्रण नियमों (Animal Birth Control Rules) के अनुपालन पर रिपोर्ट न पेश करने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों को अदालत में बुलाया था। अदालत ने पाया कि केवल कुछ राज्यों ने ही समय पर हलफनामे जमा किए हैं, जबकि अधिकांश राज्यों ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बताने का आदेश दिया है कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। यह फैसला केवल आवारा कुत्तों से संबंधित नहीं है, बल्कि यह सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था के महत्व को भी उजागर करता है।
समाज पर प्रभाव
इस तरह के फैसले से आवारा कुत्तों की समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा। यह उम्मीद की जा सकती है कि इससे न केवल आवारा कुत्तों की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
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टीम PWC News
– नेहा शर्मा
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