हल्दूचौड़ महाविद्यालय में यौन उत्पीड़न निवारण पर संगोष्ठी हुई आयोजन
Haldwani News- लाल बहादुर शास्त्री राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्दूचौड़ में प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. सीमा श्रीवास्तव के दिशा निर्देशन में यौन…
हल्दूचौड़ महाविद्यालय में यौन उत्पीड़न निवारण पर संगोष्ठी का सफल आयोजन
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कम शब्दों में कहें तो, लाल बहादुर शास्त्री राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्दूचौड़ में यौन उत्पीड़न निवारण पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
हल्दूचौड़ स्थित लाल बहादुर शास्त्री राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. सीमा श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में यौन उत्पीड़न निवारण प्रकोष्ठ ने एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों को यौन उत्पीड़न के खिलाफ जागरूक करना और विधिक जानकारियों को साझा करना था।
मुख्य वक्ता का ज्ञानवर्द्धक योगदान
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थीं डी.एल.एस.ए. की पैनल अधिवक्ता हेमलता उप्रेती। उन्होंने विद्यार्थियों को यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए विभिन्न विधिक जानकारियां दीं। उन्होंने छात्राओं को इस विषय पर और भी जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया और बताया कि किस प्रकार से वे अपनी रक्षा कर सकती हैं।
स्थानीय पुलिस का सक्रिय सहयोग
यस अवसर पर एस.आई. कोतवाली लालकुआं, वंदना चौहान ने भी छात्रों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस बुनियादी स्तर पर ऐसी घटनाओं को रोकने में कैसे मदद कर सकती है। बेहद उत्साहित विद्यार्थियों ने इस संगोष्ठी को बेहद लाभकारी बताया और वंदना चौहान की बातों को सुनकर उनमें आत्म-जागरूकता का विकास हुआ।
क्यों है यह संगोष्ठी महत्वपूर्ण?
आज के समाज में यौन उत्पीड़न एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, और इसे रोकने के लिए जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। इस संगोष्ठी ने न केवल विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान की, बल्कि उन्हें सशक्त भी किया। जानकारी पाने के बाद, विद्यार्थी अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे, और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकेंगे।
निष्कर्ष
महाविद्यालयों में आयोजित इस प्रकार की संगोष्ठियाँ न केवल कानूनी जानकारी प्रदान करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों को मानसिक और सामाजिक सुरक्षा के प्रति भी सजग करती हैं। यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए अब हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा। छात्रों के इस जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेना एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है, और हमें अपनी संस्कृति में इसे विकसित करते रहना चाहिए।
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टीम PWC न्यूज़ - सीमा श्रीवास्तव
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