उत्तराखंड के वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, ग्लेशियरों के खतरे को कम करने की पहल

उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लाॅफ) के जोखिम को...

Sep 30, 2026 - 09:53
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उत्तराखंड के वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, ग्लेशियरों के खतरे को कम करने की पहल

उत्तराखंड के वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों से संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लाॅफ) की चुनौतियों से निपटने के लिए वसुंधरा ताल में एक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित किया जा रहा है।

यह महत्वपूर्ण पहल उत्तराखंड के चमोली जनपद में की जा रही है। ग्लेशियरों से उत्पन्न संभावित बाढ़ के खतरे को मॉनिटर करने के लिए यह सिस्टम विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिक और तकनीकी दल ने इस परियोजना के लिए हरी झंडी मिल चुकी है। इससे न सिर्फ संभावित बाढ़ के संकेत समय पर मिल सकेंगे, बल्कि जोखिम के प्रति सचेत रहने में भी मदद मिलेगी।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस परियोजना के लिए दल को रवाना करते हुए कहा कि यह कदम आने वाले समय में ग्लाॅफ के खतरों को कम करने में सहायक साबित होगा। उन्होंने उल्लेख किया कि आधुनिक सेंसर और उपग्रह संचार तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे बेहतर आंकड़ा संग्रहण संभव होगा।

अभियान की विशेषताएं

यह वैज्ञानिक टीम 29 सितम्बर से 15 अक्टूबर, 2026 तक उच्च हिमालयी क्षेत्र में इस सिस्टम को स्थापित करने के लिए कार्य करेगी। अभियान में लगे वैज्ञानिकों, सुरक्षा कर्मियों और विशेषज्ञों को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लेशियल झीलों की निगरानी करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह प्राकृतिक आपदाओं की आशंका को कम करेगा। उन्होंने इस परियोजना को राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

संस्थान की भागीदारी

यह अभियान उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा चलाया जा रहा है और इसमें केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) तथा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। अभियान की सुरक्षा और समर्थन के लिए SDRF, NDRF और ITBP के जवान भी साथ रहेंगे। इस कार्य के लिए आवश्यक सभी लॉजिस्टिक सहायता यूएसडीएमए द्वारा प्रदान की जा रही है।

सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में कुल 344 ग्लेशियल झीलें चिन्हित की गई हैं और उनमें से 13 झीलें उच्च जोखिम वाली मानी गई हैं। इनमें से कई झीलों का बाथीमेट्रिक सर्वेक्षण भी किया गया है।

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की准备

ग्लेशियल झीलों में निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना के द्वारा राज्य की आपदा तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में यह प्रणाली एक कदम और आगे बढ़ाएगी। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना बढ़ रहा है, इस प्रकार के उपायों का महत्व और बढ़ जाता है।

यह प्रणाली वसुंधरा ताल और उसके आसपास के पर्यावरणीय एवं जलवैज्ञानिक परिवर्तनों की सतत निगरानी करने की क्षमता प्रदान करेगी। इससे असामान्य घटनाओं की पहचान करने में भी मदद मिलेगी।

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हमारी ये पहल उत्तराखंड में आपदाओं की गंभीरता को कम करने में सहायक सिद्ध होगी और आशा की जा रही है कि इस तकनीक के माध्यम से स्थानीय लोगों को सतर्क रखा जाएगा।

सुरक्षित उत्तराखंड की दिशा में यह एक बड़ा कदम है और हमें इस पर गर्व है। आगे भी इस प्रकार की प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में प्रयास जारी रखेंगे।

संपादकीय मदद करने वाले सभी वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं सुरक्षा बलों को धन्यवाद।

टीम PWC News
प्रियंका शर्मा

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