उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने से विवाह पंजीकरण में चौंकाने वाला इजाफा: प्रतिदिन 1400 पंजीकरण

यूसीसी का एक साल ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण पहले विवाह पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार ऑफिस में उपस्थित होने की थी मजबूरी उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए, आगामी 27 जनवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में […] The post यूसीसी लागू होने के बाद प्रतिदिन 1400 विवाह पंजीकरण, पहले औसत था सिर्फ 67 appeared first on Uttarakhand News Update.

Jan 20, 2026 - 18:53
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उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने से विवाह पंजीकरण में चौंकाने वाला इजाफा: प्रतिदिन 1400 पंजीकरण

उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने से विवाह पंजीकरण में चौंकाने वाला इजाफा: प्रतिदिन 1400 पंजीकरण

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार हुआ है। प्रतिदिन औसतन 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या मात्र 67 थी।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए 27 जनवरी को एक साल पूरा हो जाएगा। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समानता कायम करने के साथ ही यूसीसी का एक महत्वपूर्ण योगदान प्रक्रिया के सरलीकरण के रूप में भी रहा है। इस बदलाव के कारण अब ऑनलाइन प्रणाली से विवाह पंजीकरण का कार्य अत्यंत सरल हो गया है।

यूसीसी के लागू होने से पंजीकरण में तेजी

यूसीसी लागू होने के एक साल के भीतर, 4,74,447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है। अब दंपत्तियों को दो गवाहों के साथ सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। वे कहीं से भी ऑनलाइन माध्यम से विवाह पंजीकरण स्वीकृत कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हो गई है।

पहले की पंजीकरण प्रक्रिया

समान नागरिक संहिता लागू होने से पहले, विवाह पंजीकरण 'उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत होता था। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन थी, और दंपत्तियों को गवाहों के साथ सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। लेकिन यूसीसी के लागू होने के बाद, ऐसा नहीं है। अब ऑनलाइन माध्यम से लगभग सभी विवाहों का पंजीकरण हो रहा है।

औसत पंजीकरण की संख्या और समय सीमा

यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण के लिए औसतन पांच दिन का समय लग रहा है, जबकि पुराने अधिनियम के तहत समय सीमा निश्चित नहीं थी। इसके अंतर्गत पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए समय सीमा 15 दिन थी, परंतु अधिकतर मामलों में औसत 5 दिन में ही प्रमाणपत्र मिल रहा है। यह सुधार प्रक्रिया को और भी तेज और सुविधाजनक बनाता है।

सामाजिक प्रभाव

यूसीसी की इस सफलतापूर्वक कार्यान्वयन ने अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम की है। अगली पीढ़ी के लिए यह कानून एक आदर्श स्थापित कर रहा है, जिससे लोगों का विवाह पंजीकरण के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इस नए कानून के तहत पंजीकरण कराने में रुचि दिखा रहे हैं।

अंत में, हम कह सकते हैं कि उत्तराखंड का समान नागरिक संहिता को लागू करना न केवल एक विधिक परिवर्तन है, बल्कि यह समाज की सोच और व्यवस्था में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

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सादर,

टीम PWC न्यूज, दीप्ति शर्मा

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