ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली का भव्य स्वागत, केदार घाटी गूंज उठी

स्थानीय वाद्य यंत्रों, आर्मी बैंड की मधुर धुनों और हजारों भक्तों की जयकारों के बीच...

Oct 26, 2025 - 00:53
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ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली का भव्य स्वागत, केदार घाटी गूंज उठी

ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली का भव्य स्वागत

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कम शब्दों में कहें तो, आज ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली का स्वागत स्थानीय वाद्य यंत्रों और भव्य आर्मी बैंड के मधुर धुनों के बीच किया गया। इस अवसर पर हजारों भक्तों ने जयकारे लगाए और उत्सव का आनंद लिया।

मंदिर पहुंचे इस विशेष आयोजन में स्थानीय विधायक आशा नौटियाल के साथ-साथ तीर्थ पुरोहित समाज और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा केदार की डोली का स्वागत किया। भक्तों के उत्साह ने पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।

डोली का इतिहास और महत्व

बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली का यह यात्रा क्रम हर वर्ष शीत ऋतु में आयोजित किया जाता है। यह डोली बाबा केदारनाथ की भोग मूर्ति को ओंकारेश्वर मंदिर में ले जाती है, जहाँ कि आने वाले छह महीने तक यहाँ पूजा-अर्चना की जाएगी। यह एक धार्मिक परंपरा है, जो पहाड़ों में बसे लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।

भव्य स्वागत

डोली का स्वागत स्थानीय संगीतकारों के साथ-साथ आर्मी बैंड द्वारा भी किया गया। इससे पूर्व, डोली ने यात्रा पड़ावों से गुजरते हुए फाटा, ब्यूंग और नारायणकोटी में तीर्थयात्रियों को आशीर्वाद दिया। स्थान-स्थान पर भक्तों ने भव्य स्वागत किया, जिससे केदार घाटी की ध्वनि उत्सव में गूंज उठी।

गुप्तकाशी में रात्रि प्रवास

देर शाम, डोली अपने द्वितीय रात्रि प्रवास के लिए गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुँची, जहाँ एक और भव्य स्वागत हुआ। यहाँ के निवासी और भक्त बैंड की धुनों पर झूमते हुए, बाबा केदार की जयकारों से मंदिर परिसर को गुंजायमान किया।

विधायक की तैयारियों पर बयान

इस अवसर पर विधायक केदारनाथ ने कहा कि शीतकालीन यात्रा के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्षों की तरह, इस बार भी यात्रा का सफल संचालन किया जाएगा, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में अधिक संख्या में श्रद्धालु शामिल होने की संभावना है।

पूरे आयोजन के दौरान भक्तों उत्साह और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। ओंकारेश्वर मंदिर का यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल क्षेत्र में धार्मिक आस्था को प्रबल बनाता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विविधता का भी प्रतीक है।

भक्तों और श्रद्धालुओं से भरे इस मंदिर में चिंता का कोई विषय नहीं था, केवल एक ही धुन उस दिन गूंज रही थी - 'जय बाबा केदार'।

इस भव्य अवसर के वीडियो और चित्रों की जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें

Team PWC News, राधिका शर्मा

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