कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने उपनल कर्मचारियों की हड़ताल पर धामी सरकार को घेरा
उत्तराखंड में 22 हजार उपनल कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। इसे लेकर कांग्रेस...
कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने उपनल कर्मचारियों की हड़ताल पर धामी सरकार को घेरा
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में उपनल के 22 हजार कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं, जिसके चलते प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने इस हड़ताल के पीछे की गंभीर स्थितियों पर ध्यान आकर्षित किया है।
उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से उपनल के कर्मचारियों ने अपनी सेवा शर्तों के सुधार की मांग करते हुए बेमियादी हड़ताल की घोषणा की है। इस हड़ताल को लेकर कांग्रेस ने धामी सरकार पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के कई प्रमुख अस्पतालों में, जैसे दून अस्पताल और सुशीला तिवारी अस्पताल, परिजनों के लिए उपचार करना सिरदर्द बना हुआ है। डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि "हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भीड़ बेकाबू रही, जिससे मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।"
दून अस्पताल में OPD के बाद इमरजेंसी विभाग में भी लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रतिमा सिंह ने यह भी जानकारी दी कि दून अस्पताल में लगभग 300 उपनल कर्मचारी हड़ताल पर गए हैं, जिनकी अनुपस्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
कर्मियों की नियमितीकरण की मांग
प्रतिमा सिंह ने आगे बताया कि उपनल के ये कर्मचारी मुख्य रूप से सैनिक पृष्ठभूमि के हैं और ये लंबे समय से अपने नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। "उपनल कर्मचारी नियमितीकरण के लिए सड़क पर आवाज उठाते रहे हैं" उन्होंने कहा। उच्च न्यायालय और अब सुप्रीम कोर्ट से भी इनकी वाजिब मांगों पर सकारात्मक निर्णय हुआ है। इसके बावजूद, सरकार की अनदेखी ने कर्मचारियों के मन में नाराजगी पैदा कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की हठधर्मी के कारण कर्मचारियों की परेशानियों में बढ़ोतरी हो रही है।
सरकार के प्रति तीखी टिप्पणी
डॉ. सिंह ने डॉ. धामी की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि "सरकार एक ओर तो 26 हजार नौकरियों का दावा करती है, लेकिन दूसरी ओर कोर्ट के आदेश के बावजूद, उपनल कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं किया गया है।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भाजपा सरकार केवल छीनने की नीति पर काम कर रही है और लोगों को वादे किए गए अधिकारों से वंचित कर रही है।
उन्होंने कहा, "2018 में नैनीताल उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि सभी प्रायोजित उपनल कर्मचारियों को नियमित किया जाए, परंतु सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया। अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की अपील खारिज कर दी।" इससे स्पष्ट है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया में कोई प्रगति नहीं हुई है। इससे यह समस्या न केवल कर्मचारियों को बल्कि प्रदेश की जनता को भी गंभीर संकट में डाल रही है।
संकट का समाधान आवश्यक
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और शीघ्र ही समाधान निकाले। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें। यदि सरकार जल्द ही इस मामले का निपटारा नहीं करती, तो स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है, जिससे नागरिकों को और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
निष्कर्षतः, उपनल कर्मचारियों की हड़ताल सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी है। सरकार को चाहिए कि वह गंभीरता से इन कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान दे और जल्दी से एक हल निकाले।
Team PWC News - Anjali Sharma
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