गढ़वाली फिल्म "बौल्या काका" की शानदार शुरुआत - दर्शकों का दिल जीता
अनुभवी फिल्म निर्माता शिव नारायण सिंह रावत द्वारा गढ़वाली बोली में लिखित और निर्देशित “बौल्या...
गढ़वाली फिल्म "बौल्या काका" की शानदार शुरुआत - दर्शकों का दिल जीता
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कम शब्दों में कहें तो गढ़वाली फिल्म "बौल्या काका" ने अपने प्रीमियर के साथ ही दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बना लिया है।
प्रसिद्ध फिल्म निर्माता शिव नारायण सिंह रावत द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म का प्रीमियर 31 अक्टूबर को द्वारका के विगा मॉल में हुआ। पहले ही दिन, दर्शक हॉल में पूरी तरह खचाखच भरे हुए थे और शो हाउसफुल रहा। लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त एल.एस. रावत ने समारोह में रिबन काटकर पहले शो का उद्घाटन किया, और निर्देशक शिव नारायण सिंह ने उन्हें माला पहनाई। यह फिल्म 31 अक्टूबर से एक सप्ताह के लिए विगा मॉल पीवीआर में प्रदर्शित हो रही है।
फिल्म की कहानी और परफॉर्मेंस
फिल्म की कहानी एक दिलचस्प किरदार "बौल्या काका" के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता हेमंत पांडे ने निभाया है। यह कहानी हेमंत पांडे द्वारा निभाए गए किरदार के दृष्टिकोण से शुरू होती है और उसी पर खत्म होती है। उनकी अदाकारी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
फिल्म की कहानी में दर्शकों ने उच्चतम स्तर का मनोरंजन पाया, जिससे वे अपनी सीटों से चिपके रहे। उद्घाटन के समय दर्शकों ने ढोल और बैगपाइप संगीत पर नृत्य किया, जिससे माहौल और भी उत्साहपूर्ण बन गया।
फिल्म के तकनीकी और कलात्मक पहलू
फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से चमोली के शांत और खूबसूरत वातावरण में की गई है। फिल्म के दृश्य, कैमरा वर्क और संगीत सभी ने दर्शकों को मंत्रित कर दिया है। संवाद और गीत पैसेवी, अर्थपूर्ण और रोचक रहे हैं। गढ़वाली संवाद लेखक जागेश्वर जोशी की विशेष प्रशंसा की जानी चाहिए।
फिल्म में सामाजिक समस्याएं जैसे कुरीतियों, अंधविश्वासों और पलायन के मुद्दों को जानबूझकर रोचक कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। निर्देशक शिव नारायण की अगुवाई में निर्देशित इस फिल्म ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन किया बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
सामाजिक संदर्भ
इस फिल्म में डाक्टर की भूमिका में सुमन गौर, और अन्य हालिया किरदारों में रिया शर्मा, ने अपने प्रदर्शन से तालमेल बिठाया। सुमन गौर ने मां की sensitively प्रस्तुत की है, जो दर्शकों को गहराई से छू लेती है।
फिल्म में अन्य महत्वपूर्ण पात्रों में यशस्वी, प्रीत घनश्याला, भरत शाह, कुँवर सिंह रौथाण, अनिता देवी, किमी गायत्री शामिल हैं। इस फिल्म में समर्पित वॉयस-ओवर कलाकार भूपेश कैंतुरा ने भी बढ़िया काम किया है।
निर्माण प्रक्रिया एवं संगीत
इस फिल्म के निर्माता प्रशांत कुमार और सह-निर्माता अभिषेक कुमार शामिल हैं। फिल्म का संगीत विनोद चौहान ने तैयार किया है, जबकि गीतों के बोल ध्रुपद उकी ने लिखे हैं। फिल्म का संपादन रौन नेर ने किया है और नृत्य निर्देशन असलम खान ने किया है।
फिल्म के लेखक और निर्देशक शिव नारायण सिंह रावत के अनुसार, यह फिल्म एक नई दृष्टि से बनाई गई है और इसकी उच्च-गुणवत्ता वाली सिनेमैटोग्राफी, पटकथा, संगीत और लोकेशन इसे खास बनाते हैं।
समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म का पोस्टर जारी किया। फिल्म ने न केवल दर्शकों को आकर्षित किया है बल्कि उत्तराखंडी समाज में एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है।
फिल्म "बौल्या काका" ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गढ़वाली सिनेमा में प्रतिभा का कोई कमी नहीं है। दर्शकों को इस फिल्म का इंतजार है, और यह निश्चित रूप से एक नई ऊंचाई पर पहुंचने की और कदम बढ़ा रही है।
यह फिल्म निश्चित रूप से गढ़वाली संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देती है और उत्तराखंड की विभिन्न सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश डालती है। अधिक जानकारी और अपडेट के लिए, यहाँ जाएं: PWC News
सत्यता के साथ,
टीम PWC News, साक्षी रावत
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