गन्ना किसानों की दुर्दशा पर गणेश उपाध्याय की चिंता, 500 रुपये समर्थन मूल्य की उठाई मांग
उत्तराखंड कांग्रेस नेता डॉ० गणेश उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखण्ड में लगातार चीनी उत्पादन में...
गन्ना किसानों की दुर्दशा पर गणेश उपाध्याय की चिंता, 500 रुपये समर्थन मूल्य की उठाई मांग
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड के कांग्रेस नेता डॉ. गणेश उपाध्याय ने राज्य में चीनी उत्पादन में हो रही कमी और गन्ना किसानों के हालात को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर गन्ना का समर्थन मूल्य 500 रुपये प्रति कुंटल नहीं किया गया, तो गन्ना खेती को लेकर किसानों की समस्याएं बढ़ती जाएंगी।
उत्तराखंड में चीनी उत्पादन की कमी एक गंभीर मुद्दा बनती जा रही है। डॉ. उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि गन्ने के रकबे में लगातार गिरावट हो रही है, जिसका मुख्य कारण कृषकों को उठाने वाले महंगे लागत हैं। खेतों से चीनी मिलों तक गन्ना पहुंचाने की वजह से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।
सालों से सरकारी नीतियों का किसानों पर सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है, जिसके कारण किसान गन्ना जैसी महत्वपूर्ण फसल से दूरी बना रहे हैं। उनके अनुसार, खेती में आने वाला खर्च और बाजार में मिलने वाला मूल्य असंगत हैं, जिससे किसान इस फसल को उगाने से दूर होते जा रहे हैं।
डॉ. उपाध्याय ने महंगाई की वास्तविकता पर चर्चा की, जिसमें बताया गया कि डीजल की बढ़ती कीमतें और अन्य कृषि आवश्यकताओं की महंगाई ने किसानों के हाथ में पैसे कम कर दिए हैं। जैसे कि गन्ना जुताई में 12 हजार रुपये, बीज में 16 हजार रुपये, और बाकी खर्च मिलाकर प्रति एकड़ लगभग 83 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। जबकि, सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता केवल 1 लाख 20 हजार रुपये है, जो किसानों को केवल 37 हजार रुपये की बचत देती है।
गन्ना खेती की लागत में निरंतर वृद्धि के चलते, किसान अब पॉपुलर की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पॉपुलर की फसल केवल 5 साल में तैयार होती है और इसे कई अन्य फसलों के साथ उगाया जा सकता है। इससे उन्हें प्रति वर्ष 1 लाख से सवा लाख रुपये की बचत हो रही है। इस परिवर्तन का मुख्य कारण है गन्ना खेती का बढ़ता खर्च और न्यूनतम समर्थन मूल्य की परेशानी।
किसानों का सरकार से सीधा सवाल है कि उन्हें गन्ने का मूल्य बढ़ाने के लिए एक ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार द्वारा मात्र 355 रुपये प्रति कुंटल की वृद्धि की गई है, जबकि महंगाई के हिसाब से यह काफी कम है। सभी किसानों की मांग है कि गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति कुंटल और बोनस के रूप में 100 रुपये दिलवाया जाए। यह इसके कारण है कि सरकार गन्ना मूल्य बकाया पर ब्याज के मामलों में भी गूंगी रहती है।
किसान यह समझते हैं कि अगर गन्ना और एमएसपी जैसे मुद्दों का समाधान नहीं होता, तो भविष्य में खेती करना उनके लिए अत्यधिक कठिन हो जाएगा। इस बात को लेकर किसान संगठनों ने भी आवाज उठाई है। इसलिए, यह समय है कि सरकार किसानों की समस्याओं को सुनें और उचित कदम उठाएं।
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टीम PWC News
-- सुनिता शर्मा
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