दिल्ली में अनुध्वनि संगीत महोत्सव: सुरों की महफिल में संगीत मार्तंडों का जलवा

खबर संसार नई दिल्ली.अनुध्वनि संगीत महोत्सव: संगीत मार्तंडों की मौजूदगी में सुरों से सराबोर हुई राजधानी. जी हा: ‘अनुध्वनि आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी’ और ‘साध मन’ के तत्वावधान में कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय संगीत समारोह का भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विदुषी रश्मि अग्रवाल, संगीत नाटक अकादमी के उप-सचिव श्री […] The post अनुध्वनि संगीत महोत्सव: संगीत मार्तंडों की मौजूदगी में सुरों से सराबोर हुई राजधानी appeared first on Khabar Sansar News.

Jan 2, 2026 - 09:53
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दिल्ली में अनुध्वनि संगीत महोत्सव: सुरों की महफिल में संगीत मार्तंडों का जलवा

दिल्ली में अनुध्वनि संगीत महोत्सव: सुरों की महफिल में संगीत मार्तंडों का जलवा

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कम शब्दों में कहें तो, ‘अनुध्वनि आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी’ और ‘साध मन’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय अनुध्वनि संगीत महोत्सव का भव्य समापन हुआ। इस महोत्सव में दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम को संगीत के सुरों से सराबोर किया गया।

समारोह का उद्घाटन संगीत जगत की प्रसिद्ध विदुषी रश्मि अग्रवाल द्वारा किया गया। उनके साथ संगीत नाटक अकादमी के उप-सचिव श्री सुमन कुमार और आकाशवाणी दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. पंडित संतोष नाहर ने भी इस विशेष अवसर पर दीप प्रज्वलित किया।

उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का समागम

महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित यह महोत्सव दो दिन तक चला। पहले दिन की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की अगुवाई संस्थापक और प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद मुस्तफा हुसैन ने की। उनके साथ पंडित आकाश दीप ने सरोद वादन करके माहौल में आध्यात्मिक ऊर्जा भर दी। इस दिन डॉ. अविनाश कुमार और डॉ. रिंदना रहस्य ने अपने शास्त्रीय गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दूसरे दिन की शुरुआत पंकज विशाल के अद्भुत सितार वादन से हुई। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के संगीत प्रोफेसर डॉ. आशिक कुमार ने अपनी मखमली आवाज़ में गज़लों की बेहतरीन प्रस्तुति देकर शाम को यादगार बना दिया। उनके गज़लों ने सभी उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।

संगीत का सामाजिक महत्व

इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भारतीय संगीत संस्कृति को बढ़ावा देना और नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना था। इसमें उपस्थित संगीत मार्तंडों ने न केवल संगीत की विविधता को प्रदर्शित किया, बल्कि युवाओं को प्रेरित करने का भी कार्य किया।

उस्ताद मुस्तफा हुसैन ने कहा, "इस तरह के महोत्सव से नए कलाकारों को अपने कला के प्रदर्शन का अवसर मिलता है। संगीत एक ऐसी कला है जो समाज को जोड़ती है और सांस्कृतिक समृद्धि का आधार बनती है।"

महासचिव डॉ. अनुपमा कुमारी ने भी इस महोत्सव की प्रशंसा करते हुए कहा, "संगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान और संस्कृति का एक अहम हिस्सा है।"

पारंपरिक और समकालीन संगीत का संगम

इस महोत्सव को देखकर यह स्पष्ट होता है कि आज के युवा पारंपरिक संगीत के प्रति कितने उत्साहित हैं। कई कलाकारों ने पारंपरिक संगीत के साथ-साथ समकालीन शैलियों का भी समावेश किया। यह महोत्सव संगीत के विविध रूपों को दर्शाने का एक बेहतरीन उदाहरण था।

एक विशेष संवाददाता ने बताया कि इस महोत्सव ने न केवल दर्शकों को संगीत का आनंद दिया, बल्कि कई युवा कलाकारों को भी अपने प्रतिभा दिखाने का मौका दिया।

संगीत प्रेमियों ने इस महोत्सव की जोरदार सराहना की। महोत्सव में उपस्थित दर्शकों का मानना था कि इस तरह के आयोजन संगीत की समृद्ध परंपरा को बनाए रखने में मददगार होते हैं।

महान संगीतकारों की उत्कृष्टता का यह आयोजन निश्चित रूप से भविष्य में भी कई बार देखा जाएगा। ऐसे आयोजन से यह उम्मीद की जाती है कि भारत की संगीत संस्कृति और भी मजबूत होगी।

अंतिम दिनों में, सभी कलाकारों को प्रशंसा के साथ विदाई दी गई और आयोजकों ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

महत्वपूर्ण है कि इस कार्यक्रम ने भारतीय संगीत को और भी आगे बढ़ाने का काम किया है। संगीत की इस क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को पहचानने और उनकी सराहना करने की आवश्यकता है।

इस महोत्सव के सफल समापन के साथ ही, हम संगीत प्रेमियों को आश्वासन देते हैं कि आने वाले दिनों में और भी ऐसे सृजनात्मक और प्रेरणादायक आयोजन होंगे।

आगे की अपडेट के लिए कृपया हमारी वेबसाइट पर जाएं: PWC News

संगीत महोत्सव के आयोजनों की तिथियों की जानकारी के लिए हमें फॉलो करते रहिए।

टीम PWC News, सुमिता शर्मा

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