देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल महोत्सव: 8 मिनट तक बरसे फल-फूल, गूंजे मां वाराही के जयकारे
8 मिनट तक चला अनूठा बग्वाल युद्ध, चार खाम-सात थोक के बग्वालियों ने निभाई सदियों पुरानी परंपरा, देवीधुरा को नगर
देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल महोत्सव: 8 मिनट तक बरसे फल-फूल
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कम शब्दों में कहें तो इस वर्ष देवीधुरा में बग्वाल उत्सव में एक अनूठा अनुभव देखने को मिला, जहां 8 मिनट तक फल और फूलों की बरसात हुई, वहीं लाखों श्रद्धालुओं ने मां वाराही के जयकारे लगाए।
देवीधुरा/चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। इस अनूठे उत्सव की खासियत यह थी कि इसमें चार खाम और सात थोक के बग्वालियों के बीच सदियों पुरानी परंपरा के तहत पाषाण युद्ध के बजाय इस बार फल और फूलों की बरसात हुई।
बग्वाल युद्ध की परंपरा
यह बग्वाल युद्ध सदियों से यहां की लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। हर वर्ष इस उत्सव का आयोजन रक्षाबंधन के दिन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु और पर्यटक भाग लेते हैं। बग्वाल का समय दोपहर 1:48 बजे शुरू हुआ और 1:55 बजे समाप्त हुआ, यानी करीब आठ मिनट तक यह आयोजन चला। इस दौरान बग्वाल मैदान मां वाराही की जयकारों से गूंज उठा।
फलों और फूलों की बरसात
इस बार, पाषाण युद्ध के बजाय फलों और फूलों की बरसात ने दर्शकों का मन मोह लिया। यह न केवल एक मनोरंजन का साधन था, बल्कि यह देवता को प्रसन्न करने का एक अनूठा तरीका भी था। जब फल और फूल बग्वालियों पर गिरते थे, तब उपस्थित श्रद्धालुओं का उत्साह दोगुना हो जाता था।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति
सीएम धामी सहित लाखों श्रद्धालुओं ने इस महोत्सव में भाग लिया और इसे एक ऐतिहासिक अनुभव बताया। उनकी उपस्थिति ने इस उत्सव को और भी विशेष बना दिया। सभी श्रद्धालुओं ने अपने वीणा, ढोल, और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ इस कार्यक्रम का आनंद लिया।
समापन और भविष्य की योजनाएं
इस अनोखे बग्वाल उत्सव के अंत में आयोजकों ने आगामी वर्षों के लिए और भी विशेष योजनाओं की घोषणा की। उनका उद्देश्य इस परंपरा को जीवित रखना और इसे और भी विश्व प्रसिद्ध बनाना है। आशा है कि इस तरह के आयोजन भविष्य में भी होते रहेंगे, जिससे हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहेगी।
इस बार का बग्वाल महोत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक है। इसके माध्यम से हम अपनी परंपराओं को जीवित रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों को इसका महत्व समझाते हैं।
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संपूर्ण अनुभव को देखते हुए, यह कहना गलत नहीं होगा कि देवीधुरा का बग्वाल महोत्सव न केवल एक उत्सव है, बल्कि यह हमारी पहचान का एक अभिन्न हिस्सा है।
टीम PWC News
(सीमा कुमारी)
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