ध्वज वंदन समारोह से उजागर हुआ भारतीय संस्कृति का नवजागरण: मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के […] The post ध्वज वंदन समारोह भारतीय संस्कृति के नवजागरण का संदेश : मुख्यमंत्री धामी appeared first on Uttarakhand News Update.

Jan 19, 2026 - 18:53
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ध्वज वंदन समारोह से उजागर हुआ भारतीय संस्कृति का नवजागरण: मुख्यमंत्री धामी

ध्वज वंदन समारोह से उजागर हुआ भारतीय संस्कृति का नवजागरण: मुख्यमंत्री धामी

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ में भाग लिया। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के योगदान को सराहा और भारतीय संस्कृति के नवजागरण को प्रदर्शित किया।

समारोह का महत्व

हरिद्वार में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति के प्रति एक भावात्मक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा, "माता भगवती देवी शर्मा का जीवन त्याग, बलिदान और साधना का प्रतीक है। उनके कार्यों ने लाखों लोगों को एक नई दिशा दी है।" धामी ने यह भी कहा कि गायत्री परिवार को एक संगठन के दायरे में सीमित नहीं किया जा सकता है, यह एक व्यापक चेतना की धारणा है, जो समाज को एकत्रित करती है।

उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को उसके तीर्थ स्थलों की दृष्टि से याद किया, जैसे गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, ताकि स्पष्ट हो सके कि यह स्थान भारत की आत्मा में गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "ऐसे पावन स्थान पर यह समारोह संस्कृति, संस्कार और साधना के नवजागरण का अनुभव कराता है।" मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की पहल की भी चर्चा की, जिसमें समान नागरिक संहिता और अन्य आवश्यक कानूनों को लागू करने की बातें शामिल हैं।

मंत्री शेखावत का दृष्टिकोण

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इस समारोह को एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, "सेवा, साधना और संस्कार का यह संबंध भविष्य के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जब सामाजिक मूल्य, अनुशासन और सेवा की भावना जीवन का आधार बनेंगे, तभी हम एक सशक्त संरचना का निर्माण कर सकेंगे।" इस समारोह का उद्देश्य सामूहिक चेतना को जागृत करना है।

शताब्दी समारोह का उद्देश्य

डॉ. चिन्मय पण्ड्या, जो समारोह के दलनायक हैं, ने कहा कि यह कार्यक्रम व्यक्ति को अपने दायित्वों का पुनः आविष्कार करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए कहा, "जब हम स्वयं में परिवर्तन लाते हैं, तभी समाज व राष्ट्र का नव निर्माण संभव हो पाता है।" इस समारोह का उद्देश्य सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करना है, जिससे विचार, आचरण और कर्म में बदलाव आ सके।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस शताब्दी समारोह में अनेक विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया, जिनमें पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और अन्य विधायकों का भी योगदान रहा। कार्यक्रम में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने न्यायाधीश, भारतीय अंतरिक्ष यात्री, और अन्य विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया।

आखिरी विचार

ध्वज वंदन समारोह के अवसर पर जब राजा दक्ष की नगरी कनखल में शताब्दी ध्वज लहराया गया, तो मानो एक नए युग का आरंभ हुआ। यह आयोजन 23 जनवरी तक चलेगा, जिसमें भारतीय संस्कृति और शांति का संदेश फैलाने के लिए नई दृष्टि को आकार दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम में मदन कौशिक, श्यामवीर सैनी, और अन्य प्रमुख राजनेताओं का सहयोग रहा, जो दर्शाता है कि यह समारोह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमें हमारे मूल्यों की याद दिलाता है।

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— Team PWC News, साक्षी शर्मा

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