बिंदुखत्ता में उत्तरायणी कौतिक: वॉलीबॉल चैंपियन बालाजी क्लब, सांस्कृतिक धरोहर की महत्ता

लोकसंस्कृति संरक्षण पर अतिथियों ने दिया जोर लालकुआं (जीवन गोस्वामी): जनता इंटर कॉलेज मेला मैदान, बिंदुखत्ता में आयोजित पांच दिवसीय…

Jan 14, 2026 - 00:53
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बिंदुखत्ता में उत्तरायणी कौतिक: वॉलीबॉल चैंपियन बालाजी क्लब, सांस्कृतिक धरोहर की महत्ता

बिंदुखत्ता में उत्तरायणी कौतिक की धूम

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कम शब्दों में कहें तो, बिंदुखत्ता में चल रहे उत्तरायणी कौतिक ने न केवल खेलों का उत्सव मनाया, बल्कि लोकसंस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

लालकुआं (जीवन गोस्वामी): जनता इंटर कॉलेज मेला मैदान, बिंदुखत्ता में आयोजित पांच दिवसीय उत्तरायणी कौतिक एवं मेला का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। इस दौरान मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर श्री सोमेश्वर यति जी महाराज तथा विशिष्ट अतिथि ईएसआई निदेशक जीवन कबड़वाल ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का औपचारिक उद्घाटन किया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संस्कृति की विशेषताओं को उजागर करना एवं उनके संरक्षण की दिशा में लोगों को जागरूक करना है।

वॉलीबॉल प्रतियोगिता में बालाजी क्लब बना चैंपियन

इस पारंपरिक मेले के दौरान वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ, जिसमें बालाजी क्लब ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता में क्षेत्र के कई क्लबों ने भाग लिया और खेल भावना का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। बालाजी क्लब की टीम ने अपने कठिन परिश्रम और समर्पण से सभी प्रतियोगियों को मात देकर पुरस्कार जीता। उनकी जीत ने दर्शकों में उत्साह की लहर दौड़ा दी।

संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता

मुख्यातिथि ने अपने संबोधन में बताया कि इस तरह के आयोजनों से न केवल खेलों का प्रचार होता है, बल्कि हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "हमारी संस्कृति हमारी पहचान है और इसे बनाए रखना सभी का कर्तव्य है।"

उद्घाटन समारोह के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जो स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करेगा। यह मेले 16 जनवरी तक चलेगा, जिसमें लोग खेलों का आनंद लेने के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का भी अनुभव कर सकेंगे।

इस कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि उत्तरायणी कौतिक की तैयारी कई महीनों से की जा रही थी, जिसमें स्थानीय कलाकारों और सामाजिक संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोगों में उत्साह और उमंग का माहौल देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह आयोजन न केवल मनोरंजन के लिए बल्कि संस्कृति के पुनःजीवित करने का माध्यम भी बनेगा।

इस बीच, मेले में खेलों के अतिरिक्त खाद्य स्टॉल, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि इस मेले से क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस प्रकार बिंदुखत्ता का उत्तरायणी कौतिक न केवल खेल आयोजन है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी निभाते हुए सामुदायिक एकता का प्रतीक है। सभी को इस दिग्गज आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए और हमारे लोकसंस्कृति के संरक्षण में योगदान देना चाहिए।

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सादर, टीम PWC News

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