राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण फिर से शुरू करने की मांग - मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा

नई दिल्ली: उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी कमेटी दिल्ली ने राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बधाई दी और अचिन्हित आन्दोलनकारियों की चिन्हीकरण प्रक्रिया पुनः शुरू करने की मांग की। दिल्ली–एनसीआर के अचिन्हित आन्दोलनकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2008 में जारी […] The post अचिन्हित राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन appeared first on Devbhoomisamvad.com.

Nov 8, 2025 - 18:53
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राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण फिर से शुरू करने की मांग - मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा

राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण फिर से शुरू करने की मांग - मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा

नई दिल्ली: उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी कमेटी दिल्ली ने राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बधाई दी और अचिन्हित आन्दोलनकारियों की चिन्हीकरण प्रक्रिया पुनः शुरू करने की मांग की। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - PWC News

किस मुद्दे पर है विवाद?

दिल्ली एवं एनसीआर के अचिन्हित आन्दोलनकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2008 में जारी शासनादेश के तहत, अचिन्हित आन्दोलनकारियों का चिन्हीकरण अखबार की कतरन और जिलाधिकारी के विवेकाधिकार के आधार पर किया गया था। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत, 2008 से 2017 के बीच कई आन्दोलनकारियों का चिन्हीकरण किया गया था।

महत्वपूर्ण आंकड़े और स्थिति

दिल्ली–एनसीआर से 2017 में इस प्रक्रिया के अनुसार 375 आन्दोलनकारियों का चिन्हीकरण किया गया और 13 जिलों में उनका सत्यापन भी हुआ। लेकिन उत्तराखंड सरकार ने कुछ महीनों बाद इस चिन्हीकरण प्रक्रिया को रोक दिया, जिससे कई आन्दोलनकारी अपने अधिकारों से वंचित रह गए।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी कमेटी ने पुनः सरकार से मांग की है कि वह ‘च’ बिंदु के साथ नया शासनादेश जारी करे, ताकि सत्यापित आन्दोलनकारियों को चिन्हीकरण के लाभ का अवसर मिल सके। यह मुद्दा न केवल स्थानीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उत्तराखंड के इतिहास में आन्दोलनकारियों की भूमिका को भी रेखांकित करता है।

समिति का बयान

समिति ने अपने ज्ञापन में कहा है कि राज्य आन्दोलनकारियों की पहचान उनके संघर्ष एवं बलिदान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उनका जीवन उस समय की मेहनत और संघर्ष का प्रतिक है जब उत्तराखंड का गठन हुआ था। ऐसे में, राज्य सरकार द्वारा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

समाज में प्रतिक्रिया

समाज के विभिन्न वर्गों से भी इस मामले में प्रतिक्रिया आ रही है। कई सामाजिक संगठनों ने आन्दोलनकारियों के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाने का निर्णय लिया है। लोगों का मानना है कि चिह्नित आन्दोलनकारियों को सम्बंधित लाभ मिलना चाहिए ताकि वे अपने संघर्ष के फल का आनंद ले सकें।

कम शब्दों में कहें तो, अचिन्हित आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया है। इसके तहत, 2008-2017 के बीच जिन आन्दोलनकारियों को चिन्हित किया गया था, उनकी स्थिति को सुधारने की आवश्यकता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से सरकार को उन लोगों के बलिदान को सम्मान देना चाहिए जिन्होंने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें. Team PWC News - कविता शर्मा

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