रामनगर तहसील में खामियों पर कमिश्नर का सख्त रुख: अधिकारियों को जवाब देना होगा
तहसील कार्यालय रामनगर के निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त कुमाऊं दीपक रावत ने लंबित राजस्व मामलों...
रामनगर तहसील में खामियों पर कमिश्नर का सख्त रुख: अधिकारियों को जवाब देना होगा
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कम शब्दों में कहें तो, रामनगर तहसील में कमिश्नर दीपक रावत ने खामियों को लेकर गंभीरता से संज्ञान लिया है और अधिकारियों को निरीक्षण के बाद जवाब देने का आदेश दिया है। इस विषय में और अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट PWC News पर जाएँ।
तहसील कार्यालय रामनगर के हालिया निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त कुमाऊं, दीपक रावत ने लंबे समय से लटके राजस्व मामलों पर ठोस कार्रवाई का निर्देश दिया। ये निरीक्षण सोमवार को किया गया, जिसमें उन्होंने न्यायालयीन वादों, दाखिल-खारिज मामलों, और धारा-143 के प्रकरणों का गहराई से विश्लेषण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए कि किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
दाखिल-खारिज मामलों पर नाराज़गी
मंडलायुक्त दीपक रावत ने खासकर दाखिल-खारिज की पत्रावलियों के 35वें दिन निरस्त होने वाले मामलों को लेकर विशेष नाराजगी जताई। उन्होंने तहसीलदार से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा और निर्देश दिया कि दाखिल-खारिज मामलों का नियामानुसार परीक्षण कर निर्धारित समय सीमा में निस्तारण किया जाए। इस दिशा में सख्त दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है ताकि आम लोगों को समय पर सेवाएं मिल सकें।
‘खुर्रे’ से जुड़े मामलों की समीक्षा
मंडलायुक्त ने दो वर्षों से अधिक समय से लंबित खुर्रे से जुड़े मामलों की समीक्षा की और संबंधित पटवारियों से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने उप जिलाधिकारी को सभी लंबित प्रकरणों की नियमित निगरानी करने को कहा। यह प्रशासनिक दिशा-निर्देश यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार राजस्व संबंधित समस्याओं को गंभीरता से ले रही है।
धारा-143 मामलों पर सख्त निर्देश
धारा-143 से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण पर भी मंडलायुक्त ने सख्ती दिखाई। उन्होंने सभी प्रकरणों के निस्तारण को 10 दिन के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस प्रकार के निर्देश यह संकेत करते हैं कि शासन की प्रवृत्ति पारदर्शिता, नियमबद्धता, और समयबद्धता को प्राथमिकता देना है।
अधिवक्ताओं की मांगें
निरीक्षण के दौरान अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंडलायुक्त से मुलाकात की और तहसील में एक अहलमद की तैनाती की मांग रखी। मंडलायुक्त ने इस पर प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही का आश्वासन दिया और अधिकारियों से म्यूटेशन से जुड़े मामलों में आम लोगों को जागरूक करने में भी सहयोग की अपील की।
भविष्य की दिशा
जब मामलों को वर्षों तक लटकाया जाता है, तो सवाल यह उठता है कि जिम्मेदारी किसकी होगी? मंडलायुक्त के निर्देशों के आलोक में, संबंधित अधिकारियों और पटवारियों से मांगे गए स्पष्टीकरण तथा लंबित मामलों के निस्तारण पर नजर रखा जाएगा। यह अपेक्षित है कि इससे जनता को बेहतर सेवा मिलने में मदद मिलेगी।
हालांकि, यह जरूरी है कि शासन अपने स्तर पर कार्रवाई भी करे ताकि ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो जहाँ आम जनता को अन्याय का सामना करना पड़े। ऐसे मामलों को शीघ्र सुलझाने से न केवल प्रशासन का स्तर ऊँचा होगा, बल्कि लोगों का विश्वास भी बरकरार रहेगा।
निरीक्षण में उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान, तहसीलदार मनीषा मकराना, और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस प्रकार के निरीक्षण आवश्यक हैं ताकि लोक सेवाओं को प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सके।
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सादर,
टीम PWC News - संगीता शुक्ला
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