समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान और अब्दुल्ला को जाली दस्तावेज़ केस में 7 साल की सजा
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को रामपुर की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने दोहरे पैन कार्ड मामले में सात साल कैद की सजा सुनाई है। यह मामला दिसंबर 2019 में दर्ज किया गया था, जिसमें दोनों पर अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड रखने का आरोप लगाया गया था। […] The post जाली दस्तावेज़ केस में सपा नेता आज़म खान और अब्दुल्ला दोषी, 7 साल सज़ा appeared first on Khabar Sansar News.
समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान और अब्दुल्ला को जाली दस्तावेज़ केस में 7 साल की सजा
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कम शब्दों में कहें तो समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को रामपुर की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने जाली दस्तावेज़ों के मामले में सात साल की कैद की सजा सुनाई है। यह मामला दिसंबर 2019 में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप था कि दोनों ने अलग-अलग जन्मतिथियों वाले पैन कार्ड बनाए थे।
यह मामला भाजपा नेता आकाश सक्सेना की ओर से की गई शिकायत पर आगे बढ़ा था, जहाँ उन्होंने आरोप लगाया कि आज़म खान और उनके बेटे ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दो पैन कार्ड बनाए और उनका उपयोग बैंकिंग लेनदेन, आयकर दाखिलियों और अन्य औपचारिकताओं में किया।
जाली दस्तावेज़ों के गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार, अब्दुल्ला आज़म के नाम पर जारी किए गए पैन कार्डों में जन्मतिथियाँ भिन्न थीं:
- पहला पैन कार्ड: 1 जनवरी 1993
- दूसरा पैन कार्ड: 30 सितंबर 1990
इन दोनों पैन कार्डों का उपयोग विभिन्न अवैध कार्यों के लिए किया गया था, जिससे जांच के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी दस्तावेज़ में छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया था।
अदालत में सुनवाई और सजा का ऐलान
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आज़म खान और उनके बेटे को दोषी करार दिया। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें अदालत कक्ष में ही गिरफ्तार कर लिया गया। सुनवाई के समय शिकायतकर्ता विधायक आकाश सक्सेना भी कोर्ट में उपस्थित थे, और इस निर्णय के बाद अदालत ने दोनों को सात साल की कठोर सजा सुनाई।
राजनीतिक Landscape में बदलाव
यह मामला प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। आज़म खान पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवादों का सामना कर रहे थे, और यह सजा उनके राजनीतिक करियर पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। जहाँ एक ओर यह मामला अपरोक्ष रूप से भाजपा द्वारा उनके खिलाफ उठाए गए कदमों को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के भीतर से भी आवाजें उठने लगी हैं।
यह फैसला प्रदेश की राजनीति में एक नया परिप्रेक्ष्य स्थापित कर सकता है, और अगले चुनावों में इसका प्रभाव पड़ना तय है। नेताओं और आम जनता दोनों के लिए यह एक बड़ा सबक है कि कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करना किस तरह की सजाएँ ला सकता है।
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टीम PWC News - साक्षी शर्मा
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