उत्तराखंड में मतदाता सूची का नया आंकड़ा: हर जिले में कमी, क्या है कारण?

देहरादून खबर संसार. SIR क़े बाद उत्तराखंड में मतदाताओं की बिल्कुल नई तस्वीर, हर जिले शहर में हुए कम वोटर, जी हा भारत निर्वाचन आयोग उत्तराखंड क़े मुख्य चुनाव आयुंक्त बीबीआरसी पुरुषोत्तम ने प्रेस को बताया कि अंतिम मतदाता सूची में 7158949 मतदाता है जिसमे 3737701 पुरुष मतदाता जबकि 3421036 महिला मतदाता और 212 थर्ड […] The post SIR क़े बाद उत्तराखंड में मतदाताओं की बिल्कुल नई तस्वीर, हर जिले शहर में हुए कम वोटर appeared first on Khabar Sansar News.

Oct 4, 2026 - 09:53
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उत्तराखंड में मतदाता सूची का नया आंकड़ा: हर जिले में कमी, क्या है कारण?

उत्तराखंड में मतदाता सूची का नया आंकड़ा: हर जिले में कमी, क्या है कारण?

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मतदाता संख्या में कमी आई है। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, अब कुल 7,158,949 मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 3,737,701 पुरुष और 3,421,036 महिलाएं हैं। यह बदलाव हाल में संपन्न विशेष समीक्षा के परिणामस्वरूप सामने आ रहा है।

आंकड़ों का संक्षिप्त विवरण

भारत निर्वाचन आयोग, उत्तराखंड के मुख्य चुनाव आयुक्त बी.बी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने इसी सप्ताह इस आंकड़े का खुलासा किया। आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची से कुल 826,977 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 129,872 नए मतदाता जोड़े गए हैं।

हर जिले में हुए कम वोटर

अगर हम विभिन्न जिलों पर नज़र डालें, तो नैनीताल में मतदाताओं की संख्या 765,135 से घटकर 697,547 रह गई है। इसी तरह, अल्मोड़ा में पहले 527,423 मतदाता थे, जो अब 476,536 हैं।

  • पिथौरागढ़: पहले 368,933, अब 343,638
  • बागेश्वर: पहले 213,929, अब 205,689
  • चम्पावत: पहले 206,642, अब 190,988
  • उधम सिंह नगर: पहले 1,333,345, अब 1,147,030
  • उत्तरकाशी: पहले 242,822, अब 225,050
  • चमोली: पहले 295,623, अब 276,007
  • रुद्रप्रयाग: पहले 191,596, अब 182,436
  • टिहरी: पहले 507,253, अब 466,638
  • देहरादून: पहले 1,376,813, अब 1,194,749
  • हरिद्वार: पहले 1,376,422, अब 1,245,458
  • पौड़ी: पहले 554,827, अब 507,135

विश्लेषण: क्या है कमी के पीछे का कारण?

यह प्रश्न उठता है कि हर जिले में मतदाताओं की संख्या में कमी के पीछे क्या कारण हो सकते हैं। एक संभावना यह हो सकती है कि कई लोग जो बाहर जा चुके हैं या जिनका वोटर पहचान पत्र अद्यतन नहीं हुआ है, उनके नाम सूची से हटा दिए गए हों। इसके अलावा, युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है, जहां बहुत से युवा मतदाता अपनी स्थिति को सही करने में असफल रहे।

मौजूदा वक्त में, 18 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के मतदाता संख्या 72,656 है, और 80 वर्ष से ऊपर के मतदाताओं की संख्या 122,892 है। यह दर्शाता है कि युवा मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।

आगे की राह

आयोग को चाहिए कि वह अधिक से अधिक प्रोत्साहन प्रदान करे ताकि लोग वोटर बनने के लिए आगे आएं। इसके तहत, शिक्षा संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी जानकारी पहुंचाई जा सकती है।

साथ ही, जगह-जगह कैम्प लगाकर और गली-मोहल्लों में प्रचार प्रसार कर भी अंतिम मतदाता सूची को अपडेट किया जा सकता है। इससे न केवल मतदान में भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि यह लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा।

अधिक जानकारी और नवीनतम अपडेट्स के लिए, यहां क्लिक करें.

टीम PWC News - राधिका शर्मा

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