काली कुमाऊं की होली: हमारी गौरवमयी लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक पहचान - मुख्यमंत्री धामी

लोहाघाट होली रंग महोत्सव में शामिल हुए सीएम धामी, जनसमुदाय संग साझा की उत्सव की खुशियां लोहाघाट/चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह

Feb 27, 2026 - 18:53
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काली कुमाऊं की होली: हमारी गौरवमयी लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक पहचान - मुख्यमंत्री धामी

काली कुमाऊं की होली: हमारी गौरवमयी लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक पहचान - मुख्यमंत्री धामी

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोहाघाट में आयोजित काली कुमाऊं होली रंग महोत्सव में भाग लेते हुए इस पर्व की महत्वपूर्णता को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह होली हमारी समृद्ध लोकपरंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

होली महोत्सव का आयोजन

शुक्रवार को लोहाघाट के रामलीला मैदान में आयोजित इस महोत्सव में मुख्यमंत्री धामी ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने न केवल पारंपरिक कुमाऊंनी होली का आनंद लिया, बल्कि शास्त्रीय होली गायन में भी जनसमूह के साथ सहभागिता की। इस होली महोत्सव में स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को मनाया।

सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

मुख्यमंत्री धामी ने जनसमूह को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि काली कुमाऊं की होली एक ऐसा पर्व है, जो हमारी सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि ऐसे उत्सव केवल एक पर्व नहीं हैं, बल्कि यह हम सबको एकजुट करने का साधन भी हैं।

समुदाय के लोग एकत्रित हुए

महोत्सव के दौरान, लोहाघाट के विभिन्न समुदायों के लोग एकत्रित हुए। उन्होंने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं। इस प्रकार का सामूहिक उत्सव न केवल सांस्कृतिक विरासत को जीता है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय को एकजुट भी करता है।

होली के महत्व पर विचार

सीएम धामी ने यह भी कहा कि होली का पर्व हमें भाईचारे और एकता का संदेश देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि हमें अपने मतभेदों को भुलाकर एक साथ मिलकर जीना चाहिए। उन्होंने स्थानीय युवाओं से अपील की कि वे इस परंपरा को जीवित रखकर अपने सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करें।

आगामी चिंताएँ और अवसर

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी व्यक्त किया कि हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसमें न केवल सरकार की भूमिका है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखें। उन्होंने जोश के साथ आशा प्रकट की कि आने वाले वर्षों में इस महोत्सव का महत्व और भी बढ़ेगा।

इस महोत्सव के माध्यम से, हमें यह समझने का अवसर मिला कि हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को कैसे बनाए रख सकते हैं और उसे आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचा सकते हैं। लोहाघाट का यह होली महोत्सव हमें एकजुट होकर अपने सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।

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इस प्रकार से, काली कुमाऊं की होली न केवल एक त्योहार है, बल्कि हमारी व्यक्तिगत और सामूहिक पहचान को मजबूत करने का भी एक माध्यम है।

Team PWC News - सुमिता शर्मा

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