चम्पावत: जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से खत्म हुआ बीडीसी सदस्यों का धरना, विकास कार्यों पर हुई सहमति

लोहाघाट/चम्पावत। राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त में अनियमित्ताएं बरते जाने, टेंडर में गड़बड़ी, उनकी योजनाओं को कार्ययोजनाओं में शामिल न

Jan 2, 2026 - 18:53
 52  501.8k

चम्पावत: जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से खत्म हुआ बीडीसी सदस्यों का धरना

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - PWC News

कम शब्दों में कहें तो चम्पावत के बीडीसी सदस्यों का धरना जिलाधिकारी मनीष कुमार की पहल पर समाप्त हो गया है। विकास कार्यों को लेकर हुई सहमति ने इस विवाद को हल करने में मदद की है।

धरने का कारण

लोहाघाट/चम्पावत। बीडीसी सदस्यों ने राज्य और केंद्रीय वित्त में होने वाली अनियमितताओं, टेंडर में गड़बड़ी, और उनकी योजनाओं को विकास कार्यों में शामिल न किए जाने को लेकर धरना दिया था। उनका आरोप था कि स्थानीय प्रशासन ने उनकी योजनाओं की अनदेखी की है, जिससे विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है।

जिलाधिकारी की पहल

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने धरना स्थल पर पहुंचकर बीडीसी सदस्यों से वार्ता की। उन्होंने उनकी सभी शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना और समाधान का आश्वासन दिया। यह पहल सभी पक्षों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विवाद को सुलझाने में सहायक सिद्ध हुई। इस बातचीत में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की भी बात की गई, ताकि उन योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके जो स्थानीय समुदाय के लिए आवश्यक हैं।

स्थानीय प्रशासन का दृष्टिकोण

स्थानीय प्रशासन ने इस बातचीत में यह सुनिश्चित किया कि सभी विकास कार्य ग्राम पंचायतों और बीडीसी के सदस्यों की सहभागिता से ही होंगे। यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब भौतिक रूप से विकास और प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सहमति का महत्व

इस वार्ता के नतीजे के बाद बीडीसी सदस्यों ने धरना समाप्त कर दिया है। यह सहमति न केवल विकास कार्यों की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति एक विश्वास का निर्माण भी हुआ है। अब सभी मिलकर विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

भविष्य में, यह आवश्यक है कि स्थानीय सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद कायम रहे। इससे न केवल विकास कार्य सुस्पष्ट होंगे, बल्कि समुदाय की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।

निष्कर्ष

जिलाधिकारी मनीष कुमार की इस पहल से स्पष्ट होता है कि प्रशासन सिर्फ आदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय लोगों की आवाज सुनने और उन्हें सही दिशा देने का कार्य भी करता है। इस तरह के कदम से लोकतंत्र और स्थानीय आवाज को प्राथमिकता मिलती है।

स्थानीय मुद्दों पर अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें

सभी सदस्यों के सहयोग से अपेक्षित विकास कार्यों का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। हमें आशा है कि यह प्रक्रिया जारी रहेगी और सभी पक्षों की भागीदारी से विकास की नई ऊँचाइयाँ छुआ जाएँगी।

टीम PWC न्यूज - प्रियंका शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow