सुरंग की पहाड़ियों में नई आशा—‘बाजयल’ समिति की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम
सपनों को पंख: ओखलकांडा में महिलाओं की दुग्ध सहकारिता का सशक्त आरंभ मालाओं और प्रेम की खुशबू के बीच हुआ…
सुरंग की पहाड़ियों में नई आशा—‘बाजयल’ समिति की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम
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कम शब्दों में कहें तो, ओखलकांडा में महिलाओं की दुग्ध सहकारिता ने एक नई शुरुआत की है, जो आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम है।
ओखलकांडा की कहानी
ओखलकांडा की सुरंग की पहाड़ियों में महिलाओं ने एक नई उम्मीद का संचार किया है। यहां, 'बाजयल' समिति के माध्यम से महिलाओं ने दुग्ध सहकारिता का एक सशक्त आरंभ किया है। इस पहल के तहत, महिलाओं ने अपनी मेहनत एवं समर्पण के साथ मिलकर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा को गढ़ा है। अध्यक्ष मुकेश बोरा के भावनात्मक स्वागत के साथ, इस कार्यक्रम ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा
महिलाओं के इस समूह ने न केवल अपनी ताकत को पहचाना है, बल्कि एक साथ मिलकर कार्य करने से आत्मविश्वास और हौसला भी हासिल किया है। दुग्ध सहकारिता के माध्यम से, गांव की महिलाओं ने विकास की नई राह पर कदम बढ़ाया है। महिला सदस्यों का कहना है कि इस सहकारिता ने उनके जीवन में खुशियों के नए रंग भर दिए हैं।
समिति का उद्देश्य
‘बाजयल’ समिति का उद्देश्य ना केवल दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना है, बल्कि यह महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने का भी एक माध्यम है। समिति के सदस्य इस बात पर जोर देते हैं कि जब महिलाएं एक साथ जुड़ती हैं, तो वे अपनी शक्ति का अनुभव करती हैं, जो उनके भविष्य को उज्जवल बनाता है।
नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का समर्थन
नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसे लेकर वे बहुत उत्साहित हैं। उनके नेतृत्व में, यह समिति अब न केवल दुग्ध उत्पादन में, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में भी आगे बढ़ने की पुरजोर कोशिश करेगी।
समुदाय की प्रतिक्रिया
समुदाय ने इस पहल को सराहा है और महिला सदस्यों के प्रयासों की तारीफ की है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हैं और उनकी स्थिति में सुधार लाते हैं। इससे न केवल महिलाओं को, बल्कि पूरे समुदाय को लाभ होगा।
आगे का रास्ता
बाजयल समिति की महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। उनका मानना है कि वे आने वाले दिनों में और भी बड़ी सफलताएं हासिल करेंगी। इसी तरह की पहलों से पूरे देश में महिलाओं के विकास में मदद मिलेगी।
इस प्रकार, ओखलकांडा की सुरंग की पहाड़ियों में उठी इस नई उम्मीद ने सीधा संदेश दिया है—महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहेंगी।
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सादर,
टीम PWC News
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