हल्द्वानी में महार Rally की तैयारी: मुख्यमंत्री से नहीं मिला ठोस आश्वासन, यूकेडी ने किया समर्थन

बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम अधिसूचना पर ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की तैयारी, हल्द्वानी में महारैली की रणनीति;…

Oct 12, 2026 - 00:53
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हल्द्वानी में महार Rally की तैयारी: मुख्यमंत्री से नहीं मिला ठोस आश्वासन, यूकेडी ने किया समर्थन

हल्द्वानी में महार Rally की तैयारी: मुख्यमंत्री से नहीं मिला ठोस आश्वासन, यूकेडी ने किया समर्थन

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कम शब्दों में कहें तो, बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम अधिसूचना के लिए ठोस आश्वासन न मिलने पर आंदोलन और तेज होने वाला है। हल्द्वानी में महारैली की रणनीति बनाई जा रही है, जहां यूकेडी पार्टी ने समर्थन देने का ऐलान किया है।

राजस्व ग्राम अधिसूचना की मांग

हल्द्वानी में बिंदुखत्ता गांव के निवासियों द्वारा वन अधिकार कानून के तहत राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। 15 अगस्त को एक महत्वपूर्ण पदयात्रा का आयोजन किया गया था, जिसे बाद में 27 सितंबर को महारैली द्वारा अधिक मजबूती दी गई। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य ठोस आश्वासन प्राप्त करना है, जो अब तक नहीं मिला है।

अनिश्चितकालीन धरना जारी

इसके साथ ही, 5 अक्टूबर से तहसील परिसर में जारी अनिश्चितकालीन धरना अब अपने सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में दृढ़ हैं और मुख्यमंत्री की ओर से ठोस आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और प्रदर्शनकारियों में निराशा भी देखी जा रही है।

यूकेडी का समर्थन

यूकेडी (उत्तराखंड क्रांति दल) ने आंदोलनकारियों का समर्थन करने का ऐलान किया है। पार्टी के नेता इस मांग को सही ठहरा रहे हैं और बिंदुखत्ता के निवासियों के हक में खड़े होने का संकल्प लिए हुए हैं। यूकेडी के समर्थन के बाद अब यह आंदोलन और भी बड़े स्तर पर फैलने की संभावना है।

आगे की रणनीति

आंदोलनकारियों ने हल्द्वानी में महार Rally की योजना बनाई है, जिसका आयोजन जल्द ही होगा। नेताओं का कहना है कि यदि सरकार द्वारा उचित कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस संदर्भ में समुदाय और अन्य संगठनों से भी समर्थन प्राप्त करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है।

निष्कर्ष

बिंदुखत्ता में चल रहे आंदोलन की गरमी के बीच, प्रवृत्तियों की नब्ज को समझना जरूरी है। स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा का यह प्रयास सामूहिक संघर्ष का एक प्रतीक बन चुका है। सरकार को चाहिए कि वह उनकी मांगों पर ध्यान देकर उचित कदम उठाए, ताकि स्थिति को संभाला जा सके।

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इस लेख को संपादित किया है: अंजलि मेहता, Team PWC News

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