उत्तराखंड में बिछड़ा सच्चा योद्धा और सजग रचनाकार: भुवन चंद्र खंडूड़ी का अंतिम सफर
सेना से सियासत तक राष्ट्रसेवा का अद्वितीय सफर थमा, पंचतत्व में विलीन हुए खंडूड़ी जी । उत्तराखंड के राजनैतिक इतिहास में आज एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने आज अंतिम सांस ली। वे पिछले काफी […] The post उत्तराखंड ने खोया अपना सच्चा सैनिक और सजग शिल्पी appeared first on Uttarakhand News Update.
उत्तराखंड में बिछड़ा सच्चा योद्धा और सजग रचनाकार
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का महाप्रयाण एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसकी भरपाई करना संभव नहीं। उनकी अनुकंपा से सेवा की अद्भुत यात्रा का अंत हो गया।
उत्तराखंड के राजनैतिक इतिहास में आज एक ऐसा क्षण आया है, जिसका अविस्मरणीय भावनात्मक असर जन-मानस पर पड़ा है। भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री, भुवन चंद्र खंडूड़ी, जिन्होंने अपने जीवन को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया, उन्होंने आज अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रस्त थे।
उनके निधन की खबर मिलीते ही राज्य और देश के विभिन्न राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। देहरादून स्थित उनके आवास पर हाल के दिनों में उनके अनुयायी और राजनीतिक नेता इनके स्वास्थ्य की प्रार्थना करने के लिए एकत्रित होते रहे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और उत्तराखंड ने अपने इस महान पुत्र को हमेशा के लिए खो दिया।
अटल जी की प्रेरणा: एक नया मोड़
भुवन चंद्र खंडूड़ी जी की राजनीतिक यात्रा जितनी अद्भुत थी, उतनी ही अनपेक्षित भी। सेना से रिटायर होने के बाद उनका इरादा किसी राजनीतिक दल में शामिल होने का नहीं था। वर्ष 1990 में उन्होंने देहरादून में एक साधारण और शांत जीवन जीने की योजना बनाई थी।
तभी, देश के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उनकी अद्वितीय प्रशासनिक क्षमता और ईमानदारी को पहचानते हुए उन्हें प्रेरित किया। अटल जी के विशेष आग्रह पर खंडूड़ी जी ने खाकी (सेना) का दामन छोड़ कर खादी (राजनीति) को अपनाने का निर्णय लिया।
विकासपुरुष और ईमानदारी की मिसाल
खंडूड़ी जी ने अपने राजनीतिक सफर में कभी भी फौजी अनुशासन और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और त्वरित निर्णय लेने की नीति के लिए जाना जाता है। उनकी योजनाओं ने उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया और राज्य को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके निधन के साथ, भारतीय राजनीति ने न केवल एक दूरदर्शी नेता को खो दिया, बल्कि ईमानदारी के एक युग का भी अंत हो गया है। उत्तराखंड हमेशा उन्हें एक 'सच्चे सैनिक और सजग शिल्पी' के रूप में याद रखेगा। उनकी दृष्टि और नीतियां भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरণা बनकर रहेंगी।
उनके योगदान और समर्पण का स्थान हमेशा सुरक्षित रहेगा, और उत्तराखंड की धरती पर उनका नाम हमेशा सर्वोच्च रहेगा।
इस महान आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हम एक बार फिर कहते हैं, भुवन चंद्र खंडूड़ी जी के बिना उत्तराखंड की आकांक्षा अधूरी है।
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Team PWC News - प्रिया शर्मा
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