एशिया में बदल सकता है शक्ति संतुलन? चीन ने किया जापान पर विवादित दावा
ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच चीन की एक रिपोर्ट ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। चीनी सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि एशिया का एक देश तेजी से दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है—और वह देश है […] The post क्या बदलने वाला है एशिया का समीकरण? चीन का जापान पर बड़ा दावा appeared first on Khabar Sansar News.
एशिया में बदल सकता है शक्ति संतुलन? चीन ने किया जापान पर विवादित दावा
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कम शब्दों में कहें तो, चीन की एक नई रिपोर्ट ने आज एशिया के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। जापान को लेकर किए गए कुछ गंभीर दावों ने वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हाल ही में, ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच, चीन के सरकारी मीडिया ने यह दावा किया है कि जापान तेजी से दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट के तहत, जापान की अंतर्सामरिक रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया है, जिनमें परमाणु हथियारों का निर्माण केवल एक हिस्सा है।
जापान की "गुप्त महत्वाकांक्षा"
रिपोर्ट में उल्लेखित किया गया है कि जापान की यह रणनीति न केवल आत्मरक्षा के इरादे से है, बल्कि इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर परमाणु शक्ति के रूप में एक प्रमुख स्थान हासिल करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक "गुप्त महत्वाकांक्षा" है, जिसके पीछे कई कारक हो सकते हैं।
चीन के पीएलए डेली का आरोप
चीन के सैन्य मुखपत्र ‘पीएलए डेली’ ने इस विषय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 30 मार्च को प्रकाशित पत्रिका में कहा गया है कि जापान के पास इतनी परमाणु सामग्री है कि वह कम समय में एक प्रमुख न्यूक्लियर ताकत बन सकता है। इसी के साथ उसने जापान की रक्षा क्षमताओं को लेकर सवाल उठाए हैं, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंताजनक सिद्ध हो सकते हैं।
जापान का प्लूटोनियम भंडार
इस रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा जापान के प्लूटोनियम भंडार के बारे में किया गया है। इसमें बताया गया है कि जापान के पास कुल 44.4 टन प्लूटोनियम है, जिससे अनुमानित तौर पर करीब 5,500 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि यह आंकड़ा दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति माने जाने वाले रूस से भी अधिक है।
विदेशी प्लूटोनियम भंडार
जापान का प्लूटोनियम केवल देश के भीतर नहीं बल्कि विदेशों में भी संग्रहित है। रिपोर्ट के अनुसार, जापान के पास:
- 8.6 टन प्लूटोनियम जापान में
- 21.7 टन ब्रिटेन में
- 14.1 टन फ्रांस में
यह प्लूटोनियम न्यूक्लियर प्लांट्स से निकलने वाले रेडियोधर्मी कचरे से तैयार किया जाता है, जिसका संभावित उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।
परमाणु सिद्धांत पर सवाल
जापान ने 1967 में तीन परमाणु-विरोधी सिद्धांत अपनाए थे:
- परमाणु हथियार नहीं रखेगा
- परमाणु हथियार नहीं बनाएगा
- अपने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की अनुमति नहीं देगा
हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि जापान इन सिद्धांतों से पीछे हटता है, तो वह अत्यंत तेज़ी से एक परमाणु शक्ति बन सकता है।
डिफेंस सेक्टर में तेजी
चीन की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान न केवल नागरिक तकनीक अपनाकर अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ा रहा है, बल्कि वह अपने सैन्य बजट में भी जबरदस्त वृद्धि कर रहा है।
- 2025 में टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन प्रोग्राम के लिए 109.6 मिलियन डॉलर का बजट निर्धारित किया गया है।
- यह अनुमान 2022 के मुकाबले 18 गुना अधिक है।
यह परिवर्तन जापान की सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ को इंगित करता है।
NPT संधि और वैश्विक नियम
जापान और ईरान दोनों ही परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के सदस्य हैं, जिसमें केवल 5 देशों को परमाणु हथियार रखने की अनुमति है। हालांकि, इस संधि का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और वैश्विक शांति को बनाए रखना है।
जापान के इस नए रुख से एशिया के शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण परिवर्तन आ सकता है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए एक चिंता का विषय बन सकता है। इस संदर्भ में सभी देशों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
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जयश्री ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है।
सादर, टीम PWC News
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