चीफ जस्टिस ने कहा: "ज्ञानेश जैसा सरक्षण जजों को भी नहीं है"
खबर संसार दिल्ली.ज्ञानेश जैसा सरक्षण तो हम जजो को भी नहीं है बोले चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकान्त, जी हा साफ साफ कहा ऐसा सरक्षण तो जजो को भी नहीं है हम कानून में शामिल उन छूट की जाँच करेंगे जो मुख्य चुनाव आयुंक्त ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ने क़े बाद भी किसी भी तरह […] The post ज्ञानेश जैसा सरक्षण तो हम जजो को भी नहीं है बोले चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया appeared first on Khabar Sansar News.
ज्ञानेश जैसा सरक्षण तो हम जजो को भी नहीं है बोले चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया
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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली में चीफ जस्टिस सूर्यकान्त ने स्पष्ट किया कि उन्हें भी ज्ञानेश कुमार जैसा सुरक्षा का अधिकार नहीं है।
हाल ही में, दिल्ली में आयोजित एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकान्त ने एक महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जो विशेष सरक्षण दिया गया है, वैसा किसी भी जज को नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट उन कानूनी प्रावधानों की जांच करेगा, जो ज्ञानेश को उनके पद से हटने के बाद भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। यदि किसी भी प्रावधान को कानूनी रूप से अनुचित पाया गया, तो उसे निश्चित रूप से रद्द किया जाएगा।
जिन्हें नोटिस किया गया वे कौन हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ज्ञानेश सहित सुखविंदर, विवेक जोशी, केंद्र सरकार, और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। सभी को अगली सुनवाई में 12 अक्टूबर को अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ज्ञानेश को निलंबित किया जाता है तो इससे कामकाज प्रभावित होगा, इसलिए बेहतर होगा कि पहले उनका जवाब देखा जाए।
क्या हुआ सुनवाई में?
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग से संबंधित विषयों पर हुई सुनवाई के दौरान, सीजेआई की अध्यक्षता में एक विशेष बेंच ने ज्ञानेश कुमार द्वारा प्रस्तुत फॉर्म-6 और उस पर असत्यापित दस्तावेजों को खारिज कर दिया। ज्ञानेश का दावा था कि इन दस्तावेजों को कोर्ट ने वैध माना है, जिसे सीजेआई ने सिरे से नकार दिया।
क्या है मामला?
सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि जब चुनाव आयोग की ओर से दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे, तब उनकी जांच की जाएगी कि वह किस आधार पर प्रस्तुत किए गए थे। स्थिति यह है कि ज्ञानेश कुमार ने कोर्ट के सामने गलत जानकारी पेश की थी। हाल ही में उन्होंने कहा था कि यह सुप्रीम कोर्ट था जिसने उनके दावों को मान्यता दी थी, लेकिन कोर्ट ने इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया।
व्यापक मुद्दा: चुनावी धांधली
चुनाव अधिकारी की भूमिका और उनकी कार्रवाई को लेकर यह एक चर्चा की विषय बन गया है। चुनावी प्रक्रिया में लगातार हो रही धांधली सिर्फ देखने की बात नहीं बल्कि इस पर कार्यवाही की भी जरूरत है। विदित हो कि यह मामला देशभर में चुनावी आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
चीफ जस्टिस ने आज के इस सुनवाई में जोर देकर कहा कि SIR हर राज्य में कई लोगों के मताधिकार को प्रभावित कर रहा है, और यह गंभीर विषय है जिसे बिना किसी डिले के समाधान की जरूरत है।
ज्ञात हो कि जजों के अपने अधिकार और उनकी सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और जब तक कि सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे।
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स्रोत: Khabar Sansar News
शुभकामनाएं, टीम PWC News, नंदिनी.
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