बिंदुखत्ता में ग्रामीणों की पदयात्रा का 23वां दिन, 1500 की भीड़ ने किया विरोध, सरकार की अधिसूचना लंबित
23 दिन से जारी है पदयात्रा, 32 बस्तियों के 11,703 दावेदारों के सामुदायिक दावे का मामला; सरकार से तत्काल अधिसूचना…
बिंदुखत्ता में ग्रामीणों की पदयात्रा का 23वां दिन: 1500 की हुंकार, अधिसूचना की मांग तेज
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कम शब्दों में कहें तो, 23 दिन से बिंदुखत्ता के ग्रामीणों की पदयात्रा जारी है, जिसमें 32 बस्तियों के 11,703 दावेदारों के सामुदायिक दावे को लेकर सरकार से अधिसूचना जारी करने की मांग की जा रही है।
bबिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर ग्रामीण लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस पदयात्रा के 23वें दिन रविवार को ग्रामीणों ने शांतिनगर से हल्दूधार होते हुए गांधीनगर स्थित भगवती मंदिर पहुंचकर रात्रि पड़ाव किया। इस दौरान लगभग 1500 ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
पदयात्रा की पृष्ठभूमि
ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने से उनके सामुदायिक दावों को मान्यता मिलेगी। 32 बस्तियों के लोगों ने एक साथ मिलकर 11,703 दावे दर्ज कराए हैं, जिनका निपटारा अब तक नहीं हुआ है। इस परिस्थिति को देखते हुए उन्होंने यह पदयात्रा शुरू की, जो बिना किसी विराम के 23 दिनों से चल रही है।
ग्रामीणों की मांगें और सरकार की प्रतिक्रिया
पदयात्रा में शामिल ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग की है। हालांकि, अभी तक अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे ग्रामीणों में निराशा का माहौल है, और वे बार-बार अपनी मांगों को सही ठहराने के लिए सरकार द्वारा उचित कार्रवाई की अपील कर रहे हैं।
आंदोलन का असर
यह पदयात्रा केवल ग्रामीणों के लिए एक हक की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और सरकारी नीतियों की जांच भी कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे और भी बड़े आंदोलन की योजना बना सकते हैं।
सामुदायिक एकता का प्रदर्शन
पदयात्रा में मौजूद लोगों ने न केवल अपनी मांगों को लेकर एकता दिखाई, बल्कि स्थानीय संस्कृति और एकजुटता का भी प्रदर्शन किया। उनके संघर्ष ने एक नया जोश भर दिया है, जिससे यह साफ है कि वे किसी भी हाल में अपनी हक की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि इस पदयात्रा ने बिंदुखत्ता के ग्रामीणों को एकजुट होकर अपने हक की आवाज उठाने की प्रेरणा दी है। उनकी गोष्ठियों और सांस्कृतिक गतिविधियों ने इस आंदोलन को और भी अधिक मानवीय रंग में रंग दिया है।
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सादर, टीम PWC News - नंदिनी शर्मा
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