विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 'समावेशी शिक्षा मिशन-2030': शिक्षा के नए आयाम की शुरुआत

**मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक निजी होटल में शाइन अवी लर्निंग के “समावेशी शिक्षा मिशन-2030” का शुभारंभ किया।** इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग करिकुलम पर आधारित विभिन्न पुस्तकों एवं शिक्षण सामग्री का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शाइन […] The post विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को मिलेगा नया आयाम, ‘समावेशी शिक्षा मिशन-2030’ शुरू appeared first on Uttarakhand News Update.

Jul 20, 2026 - 00:53
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विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 'समावेशी शिक्षा मिशन-2030': शिक्षा के नए आयाम की शुरुआत

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 'समावेशी शिक्षा मिशन-2030': शिक्षा के नए आयाम की शुरुआत

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को एक नया रूप देने के लिए 'समावेशी शिक्षा मिशन-2030' की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य न केवल शिक्षा को सुलभ बनाना है, बल्कि इसे और भी प्रभावी, सरल और समावेशी बनाना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून के राजपुर रोड स्थित एक निजी होटल में इस मिशन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग करिकुलम पर आधारित विभिन्न पुस्तकों और शिक्षण सामग्री का भी विमोचन किया।

अवसर और सुविधाएं

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र और राज्य सरकार का हमेशा से शिक्षा को प्राथमिकता देने का प्रयास रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भी चर्चा की, जिसका लक्ष्य बच्चों को केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समझने और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने का गुण सिखाना है।

शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, पीएम श्री विद्यालय, अटल उत्कृष्ट विद्यालय, और डिजिटल शिक्षण सामग्री जैसे कई पहल शुरू किए जा चुके हैं। इसके अलावा, समावेशी शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने के लिए विद्यालयों में रैंप, रेलिंग, स्वच्छ पेयजल, अनुकूलित फर्नीचर, और सुगम शौचालय जैसी सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की स्थिति

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में लगभग 5,800 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे विभिन्न स्तरों पर विद्यालयों में पंजीकृत हैं। 11 विशेष विद्यालयों के माध्यम से 1,300 से अधिक बच्चों को विशेष शिक्षण एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, प्रारंभिक और माध्यमिक स्तर पर 300 से अधिक विशेष शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है और शेष रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने नीति की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, ताकि राज्य का हर बच्चा अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में पास होना नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार रहना है।

प्रवासी शिक्षाविदों का योगदान

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शिक्षाविद अनीता शर्मा और शाइन अवी लर्निंग की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि अनीता शर्मा ने विदेश से लौटकर उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार का कार्य किया है, और यह अन्य प्रवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पूरे देश के लिए एक उदाहरण बना हुआ है, जहां सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू की गई और सतत विकास लक्ष्यों में पहले स्थान पर है।

समापन विचार

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र पंवार, अनीता शर्मा, रमेश भट्ट और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने राज्य को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए सराहा और कहा कि समाज के सभी वर्गों को समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अनेकों प्रयास किए जाएंगे।

इस नई पहल के हिस्से के रूप में, सरकार शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह कदम न केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक बदलाव की संचारणा करेगा।

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— Team PWC News, राधा शर्मा

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