सीएम धामी ने नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस पर आयोजित समारोह में दिखाई अपनी उपस्थिति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह...
सीएम धामी ने नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस पर आयोजित समारोह में दिखाई अपनी उपस्थिति
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस पर सम्मान समारोह में भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन भी किया तथा संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री धामी ने सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में 16 अक्टूबर को आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में भाग लिया। इस समारोह में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की सांस्कृतिक यात्रा पर प्रकाश डाला गया। समारोह के दौरान, मुख्यमंत्री ने नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया। इसके अतिरिक्त, अरुणाचल प्रदेश के चर्चित अभिनेता और रंगकर्मी श्री ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ से नवाजा गया।
संबोधन में, मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह नेगी को जन्मदिवस की बहुत सारी शुभकामनाएं दी और उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि श्री नेगी उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति के एक प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने अपने गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट प्रतिष्ठा दिलाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेगी जी के गीतों में उत्तराखण्ड के जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष और सामाजिक सरोकारों की गहराई से अभिव्यक्ति होती है।
संस्कृति के संवर्धन में मुख्यमंत्री का योगदान
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह सम्मान हिमालयी राज्यों में संस्कृति, साहित्य और सामाजिक कार्यों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को समर्पित है। श्री ताई तुगुंग को सम्मान मिलने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपरा को व्यापक पहचान दिलाकर समाज में महत्वपूर्ण योगदान किया है। उनका चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’ तेजी से लोकप्रिय हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” के विमोचन को उत्तराखण्ड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को नेगी के जीवन और संगीत यात्रा से परिचित कराएगी।
सरकार की योजनाएं
सीएम धामी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार लोकभाषाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व संवर्धन के लिए कई योजनाएं बना रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह सांस्कृतिक पहलों से कलाकारों को सम्मान और अवसर प्राप्त होंगे। वर्तमान में 275 सांस्कृतिक दलों और 226 कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है जिससे उन्हें अपने कौशल का प्रदर्शन करने और रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए, राज्य सरकार पात्र कलाकारों को निःशुल्क वाद्ययंत्र और वेशभूषा प्रदान कर रही है। इसके अतिरिक्त, आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों के लिए पेंशन बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह की गई है, जिससे 180 कलाकार लाभान्वित हो रहे हैं।
नई पीढ़ी के लिए तैयारियाँ
सीएम ने बताया कि लोककलाओं और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने के लिए छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इस पहल के माध्यम से नई पीढ़ी को पारंपरिक कला सीखा कर उनकी आधारभूत सभ्यता से जोड़ा जा सकेगा। इसके अलावा, ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ और ‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से साहित्यकारों को भी सम्मानित किया जा रहा है।
अंत में, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को न केवल पर्यटन के दृष्टिकोण से बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तत्पर है। इसके तहत ‘साहित्य ग्राम’ जैसी नई योजनाओं का विकास किया जा रहा है।
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लेखिका: सुषमा शर्मा
Team PWC News
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