रामनगर तहसील में मिलीं खामियां, कुमाऊं कमिश्नर ने मांगा जवाब

तहसील कार्यालय रामनगर के निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त कुमाऊं दीपक रावत ने लंबित राजस्व मामलों...

Sep 29, 2026 - 09:53
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रामनगर तहसील में मिलीं खामियां, कुमाऊं कमिश्नर ने मांगा जवाब

तहसील कार्यालय रामनगर के निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त कुमाऊं दीपक रावत ने लंबित राजस्व मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया। सोमवार को हुए निरीक्षण में न्यायालयीन वादों, दाखिल-खारिज, धारा-143 के प्रकरणों समेत आमजन से जुड़े राजस्व कार्यों की समीक्षा की गई। लंबे समय से लंबित मामलों पर मंडलायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।रामनगर तहसील में मिलीं खामियां, कुमाऊं कमिश्नर ने मांगा जवाब

सबसे ज्यादा नाराजगी दाखिल-खारिज की पत्रावलियों के 35वें दिन निरस्त होने के मामलों को लेकर सामने आई। मंडलायुक्त ने इस पर तहसीलदार से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए और कहा कि दाखिल-खारिज के मामलों का नियमानुसार परीक्षण कर निर्धारित समयसीमा में निस्तारण किया जाए।

वहीं दो वर्ष से अधिक समय से लंबित ‘खुर्रे’ से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान भी मंडलायुक्त ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने संबंधित पटवारियों से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। साथ ही उप जिलाधिकारी को तहसील स्तर पर लंबित सभी प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा।

धारा-143 के लंबित मामलों पर भी सख्ती दिखाते हुए मंडलायुक्त ने सभी प्रकरणों का नियमानुसार 10 दिन के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व मामलों में पारदर्शिता, नियमबद्धता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मंडलायुक्त ने न्यायालय में लंबित वादों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी मामलों में नियमित सुनवाई हो और नियमानुसार समय पर निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि लंबित प्रकरणों की लगातार समीक्षा की जाए, ताकि कार्रवाई के इंतजार में लोगों को अनावश्यक रूप से तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें।

निरीक्षण के दौरान अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने भी मंडलायुक्त से मुलाकात की। अधिवक्ताओं ने तहसील में एक अहलमद की तैनाती की मांग रखी, जिस पर मंडलायुक्त ने प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने अधिवक्ताओं से म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में आमजन को जागरूक करने में सहयोग की अपील भी की।

निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान, तहसीलदार मनीषा मकराना समेत तहसील के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

सवाल यही है—जब मामले वर्षों तक लंबित रहें तो जवाबदेही किसकी तय होगी? मंडलायुक्त के निर्देशों के बाद अब संबंधित अधिकारियों और पटवारियों से मांगे गए स्पष्टीकरण तथा लंबित मामलों के निस्तारण पर निगाह रहेगी।

 

 

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