सोशल मीडिया पर अब 2 घंटे में होगा एक्शन, AI कंटेंट पर भी लागू होगी सख्ती
भारत में सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए अनुपालन दिशा-निर्देश लागू किए हैं। Instagram, X (पहले Twitter) और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स को संवेदनशील और गंभीर कंटेंट पर अब पहले से कहीं कम समय में कार्रवाई करनी होगी। अब सिर्फ 2 घंटे में होगा […] The post सोशल मीडिया पर अब 2 घंटे में एक्शन, AI कंटेंट पर भी सख्ती appeared first on Khabar Sansar News.
सोशल मीडिया पर अब 2 घंटे में होगा एक्शन, AI कंटेंट पर भी लागू होगी सख्ती
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कम शब्दों में कहें तो, भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब 2 घंटे में गंभीर या संवेदनशील कंटेंट पर कार्रवाई की जाएगी। इससे ना केवल ऑनलाइन उत्पीड़न में कमी आएगी, बल्कि AI द्वारा बनाए गए खतरनाक कंटेंट का भी उचित प्रबंधन किया जा सकेगा।
वैश्विक ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में एक कदम
भारत में सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल की घटनाओं में निरंतर वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार ने कुछ सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं। इन नए नियमों में Instagram, X (जिसे पहले Twitter कहा जाता था), और YouTube जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को अधिकतम 2 घंटे के भीतर संवेदनशील और गंभीर कंटेंट को हटाने की आवश्यकता होगी। यह निर्णय विशेष रूप से ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी वीडियो और निजता के उल्लंघन को रोकने के लिए उठाया गया है।
अब सिर्फ 2 घंटे में होगा एक्शन
नए नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को अब केवल 120 मिनट, यानी कि 2 घंटे का समय दिया जाएगा ताकि वे संवेदनशील या नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट को हटाने में त्वरित कार्रवाई कर सकें। यह कदम ऑनलाइन उत्पीड़न से प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल राहत देने का कार्य करेगा।
इन मामलों में तुरंत हटाना होगा कंटेंट
नई गाइडलाइन के अनुसार, बिना अनुमति के निजी फोटो या वीडियो को साझा करना, बदनाम करने वाले AI द्वारा बनाए गए डीपफेक वीडियो, और गलत जानकारी फैलाने वाले कंटेंट को तुरंत हटाने की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, अदालत के आदेशों के तहत अवैध घोषित कंटेंट को हटाने की समय सीमा को 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दिया गया है।
AI कंटेंट पर डिस्क्लेमर और मेटाडेटा ज़रूरी
यदि कोई उपयोगकर्ता AI की मदद से तैयार की गई फोटो, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट अपलोड करता है, तो उसे स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि यह AI द्वारा बनाया गया है। इसके साथ ही सही डिस्क्लेमर और आवश्यक मेटाडेटा भी प्रदान करना होगा। यदि जानकारी छिपाई जाती है, तो प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट को पहचान कर वॉटरमार्क लगाकर या हटाकर कार्रवाई कर सकते हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि सामान्य फोटो एन्हांसमेंट और बुनियादी संपादन इसमें शामिल नहीं आएंगे।
बड़ी टेक कंपनियों पर बढ़ेगा कानूनी दबाव
इन नियमों का पालन आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा से जुड़ा है। यदि कोई प्लेटफॉर्म तय समय में कार्रवाई न करता है, तो वह इस सुरक्षा को गंवा सकता है। ऐसे में प्लेटफॉर्म और संबंधित अधिकारियों पर सिविल और आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी बढ़ जाती है।
फर्जी खबरों और गलत जानकारी पर त्वरित कार्रवाई
इन नए नियमों का उद्देश्य खासकर फर्जी खबरों, डीपफेक वीडियो और गलत जानकारी के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कदम उठाना है। हालाँकि, इस प्रक्रिया के कारण व्यंग्यात्मक या समाचार रिपोर्टिंग की वैध पोस्ट भी गलती से हटाए जाने की संभावना बनी रहेगी। यह एक चुनौती होगी जिस पर future में ध्यान देने की आवश्यकता है।
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सादर, टीम PWC न्यूज - प्रियंका शर्मा
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