आरबीआई फिर कर सकता है प्लास्टिक नोटों की शुरुआत, नकदी प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा

देश में नकदी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर प्लास्टिक आधारित मुद्रा नोटों को प्रचलन में लाने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। जानकारी के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने हाल ही में पटना और मुंबई में आयोजित दो महत्वपूर्ण बैठकों में इस विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श […] The post RBI फिर ला सकता है प्लास्टिक नोट, नकदी प्रबंधन को मिलेगा नया आधार appeared first on Khabar Sansar News.

Jun 1, 2026 - 09:53
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आरबीआई फिर कर सकता है प्लास्टिक नोटों की शुरुआत, नकदी प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा

आरबीआई फिर कर सकता है प्लास्टिक नोटों की शुरुआत, नकदी प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा

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कम शब्दों में कहें तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर प्लास्टिक आधारित Currency नोटों को प्रचलन में लाने की योजना बना रहा है, जिससे देश में बढ़ती नकदी की जरूरत को पूरा करने में मदद मिल सकेगी। पटना और मुंबई में हाल ही में आयोजित बैठकों में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की गई है।

प्लास्टिक नोटों की आवश्यकता का कारण

आरबीआई प्लास्टिक नोटों के विकल्प की दिशा में बढ़ रहा है क्योंकि इनकी उम्र कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक होती है। इसके साथ ही, इनकी छपाई और रखरखाव की लागत भी कम है। अब बैंकिंग तकनीकी उन्नति के कारण मशीनें प्लास्टिक नोटों की पहचान और वितरण में सक्षम हो चुकी हैं, जिससे इस पहल को फिर से जीवित करने की संभावनाएँ बढ़ती जा रही हैं।

फिजिकल नकदी की बढ़ती मांग

डिजिटल भुगतान के बावजूद, देश में नकदी की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई तक बाजार में कुल नकदी का मूल्य 42.86 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया है, जो एक रिकॉर्ड है। ग्रामीण क्षेत्रों तथा छोटे व्यापारों में नकदी की अहम भूमिका रहने के कारण, इसकी मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।

नोट छपाई पर बढ़ता खर्च

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान मुद्रा नोटों की छपाई पर खर्च 6372.8 करोड़ रुपये रहा, जोकि पिछले वर्ष के 5101.4 करोड़ रुपये से अधिक है। यह बढ़ोतरी बाजार की मांग को पूरा करने के लिए अधिक नोटों की छपाई को दर्शाती है। ऐसे में, प्लास्टिक नोट आरबीआई के लिए एक प्रभावी समाधान बन सकते हैं।

खराब नोटों का निपटान

आरबीआई के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती पुराने और खराब हो चुके नोटों का निपटान है। 2024-25 में लगभग 23.8 अरब नोट नष्ट किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्लास्टिक नोट इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की मांग

देश में 10 और 20 रुपये के छोटे नोटों की मांग लगातार बनी हुई है, जो दैनिक लेनदेन में महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, लंबे समय तक टिकाऊ नोटों की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिससे बार-बार छपाई की आवश्यकता भी कम हो सके।

सिक्कों का सीमित उपयोग

आरबीआई ने छोटे लेन-देन में सिक्कों के उपयोग को बढ़ावा देने की कोशिश की थी, लेकिन लोगों के बीच इनमें अपेक्षित स्तर की स्वीकार्यता नहीं मिल सकी। 2024-25 में लगभग 1.5 अरब सिक्कों की आपूर्ति की गई थी।

प्लास्टिक नोटों पर पहले भी चर्चा

यह पहली बार नहीं है जब प्लास्टिक नोटों पर चर्चा हो रही है। 2012 में भी इसे लेकर एक योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण यह आगे नहीं बढ़ सकी।

वर्तमान तकनीकी प्रगति

वर्तमान में बैंकिंग और नकदी वितरण प्रणाली ने काफी प्रगति की है। नई तकनीक के माध्यम से एटीएम और अन्य बैंकिंग मशीनें अब प्लास्टिक नोटों के अनुरूप बन चुकी हैं, जिससे आरबीआई इसे फिर से आजमाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

दुनिया भर में प्लास्टिक मुद्रा की सफलता

दुनिया भर के लगभग 60 देशों में प्लास्टिक मुद्रा का सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पहला प्लास्टिक नोट जारी किया था, इसके बाद कई अन्य देशों ने इसे अपनाया।

संभावित लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में प्लास्टिक नोटों को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो इससे कई लाभ हो सकते हैं, जैसे कि नोटों की उम्र बढ़ाना, छपाई की लागत कम करना, और नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना।

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सादर,
टीम PWC न्यूज़
प्रिया शर्मा

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