उत्तराखंड में अनोखा समारोह, एक साथ हुई पांच भाइयों की शादी, दुल्हनों की हुई धूमधाम से बारात

देहरादून। उत्तराखंड की जौनसार-बावर घाटी अपनी अनूठी परंपराओं के लिए विश्वविख्यात है। इसी कड़ी में चकराता तहसील के खारसी गांव

May 1, 2026 - 00:53
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उत्तराखंड में अनोखा समारोह, एक साथ हुई पांच भाइयों की शादी, दुल्हनों की हुई धूमधाम से बारात

उत्तराखंड में अनोखा समारोह, एक साथ हुई पांच भाइयों की शादी, दुल्हनों की हुई धूमधाम से बारात

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में आधुनिकता को पीछे छोड़ते हुए एक अद्वितीय विवाह समारोह देखने को मिला, जिसमें पांच भाई एक साथ शादी के बंधन में बंध गए। यह शादी जौनसार-बावर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और प्राचीन परंपराओं का जीता-जागता उदाहरण है।

जौनसार-बावर की विवाह परंपरा

देहरादून। उत्तराखंड की जौनसार-बावर घाटी दुनिया भर में अपनी अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इसी परंपरा को बनाए रखते हुए, चकराता तहसील के खारसी गांव ने फिर से पुराने ‘जोजोड़ा’ विवाह परंपरा को जीवित किया। इस बार की खास बात यह रही कि पांच भाइयों ने साथ-साथ दुल्हनों से विवाह करके एक नई कहानी रची।

दुल्हनों का स्वागत

जैसे ही यह शादी का दिन आया, दुल्हनों ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर दूल्हों के घर की ओर बारात को रवाना किया। ढोल-दमाऊ की गूंज ने वातावरण में रौनक बिखेर दी। गांववाले खुशी-खुशी इस अनोखे समारोह का हिस्सा बने और पूरे गांव ने अपनी परंपरा के प्रति गर्व का अनुभव किया। इस ख़ास मौके पर महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जिनमें उमंग और उल्लास साफ देखा जा सकता था।

एकता और भाईचारे का संदेश

इस विवाह ने न केवल पारिवारिक एकता को प्रदर्शित किया बल्कि भाईचारे का भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह स्पष्ट था कि जब हम एकजुट होकर किसी त्यौहार का जश्न मनाते हैं, तो वह आयोजन और भी खास बन जाता है। दूल्हों और दुल्हनों की बारात ने इस परंपरा को स्वीकृति दी और इसे एक नए ढंग से प्रस्तुत किया।

आधुनिकता और परंपरा का संगम

इस विवाह के आयोजन में आधुनिकता की छाप भी नजर आई। पारंपरिक रीति-रिवाजों से लेकर आधुनिक सुविधाओं तक, सब कुछ इस विवाह में शामिल किया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि यह ट्रेंड धीरे-धीरे ध्यान आकर्षित कर रहा है, जो युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में मदद कर रहा है।

अन्य गांवों के लिए उदाहरण

इस तरह के आयोजनों से अन्य गांवों को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे भी अपनी परंपराओं को जिन्दा रखने के लिए ऐसे आयोजनों का सहारा ले सकते हैं। इस मामले में, खारसी गांव ने न केवल अपनी परंपरा को जीवित रखा, बल्कि युवा पीढ़ी को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस विवाह ने सभी को यह समझाया कि पारंपरिक विवाह केवल एक बंधन नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक अहम हिस्सा हैं।

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संपर्क के लिए: टीम PWC News (साक्षी चोपड़ा)

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