उत्तराखंड में मानसून से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण...
उत्तराखंड में मानसून से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी
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कम शब्दों में कहें तो: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मानसून से पहले आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया।
हाल ही में, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), गृह मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से मानसून पूर्व तैयारियों पर केंद्रित था और शुक्रवार को सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।
कार्यक्रम का समापन सत्र एवं संबोधन करते हुए उपाध्यक्ष, सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग, श्री विनय रूहेला ने उल्लेख किया कि इस कार्यशाला से उत्तराखण्ड में मानसून जनित आपदाओं के जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों को भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, शहरी बाढ़ और अन्य मानसून जनित आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए नवीन तकनीकों और समन्वय तंत्र की जानकारी मिली।
इस प्रशिक्षण के दौरान एनआईडीएम के प्रोफेसर नवनीत कुमार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण आपदाओं के स्वरूप में जटिलता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है, जिसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवीनतम तकनीकें और संस्थागत तैयारियों की आवश्यकता है। उन्होंने कार्बन ट्रेडिंग के क्षेत्र में उत्तराखंड द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की और इसे पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन विभिन्न आपदा प्रबंधन के पहलुओं पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों ने आपदा प्रभावित व्यक्तियों को साइको-सोशल सपोर्ट, राहत प्रबंधन और समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की। साथ ही, टेबल-टॉप एक्सरसाइज में काल्पनिक आपदा स्थितियों में विभागों के बीच समन्वय, संसाधन प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम में भूस्खलन जोखिम मूल्यांकन, आपदा प्रबंधन चक्र और जलवायु परिवर्तन जनित चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। वर्तमान में ड्रोन, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, मोबाइल एप्लीकेशन जैसे आधुनिक उपकरण आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाते हैं। इसके अलावा, पूर्व चेतावनी प्रणाली और अंतिम व्यक्ति तक सूचना पहुंचाने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यक्रम से प्रतिभागियों को प्राप्त ज्ञान, अनुभव और सुझाव राज्य में मानसून जनित आपदाओं के प्रति तैयारियों को और अधिक सुदृढ़, समन्वित और प्रभावशाली बनाने में मदद करेंगे।
राहत शिविर प्रबंधन और राहत सामग्री वितरण
देहरादून में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहत शिविरों के प्रभावी संचालन और राहत सामग्री वितरण व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों को राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाओं जैसे कि आवास, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं के प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसी तरह, आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री किट की संरचना और वितरण प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।
इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कार्यक्रम की सफलता पर जोर दिया और राज्यों में मानसून की चुनौतियों को सामने रखकर उनके समाधान के लिए बेहतर योजनाएं बनाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।
इसके अतिरिक्त, आदान-प्रदान में सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और आपसी सहयोग को बढ़ाने हेतु विभिन्न सुझाव दिए, जिससे आपदा प्रबंधन की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो सके।
इसी तरह, आपदा प्रबंधन विभाग की यह पहल न केवल सूबे की सुरक्षा को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि जनता में जागरूकता को भी बढ़ावा देगी।
इन प्रयासों के साथ, उत्तराखंड सरकार मानसून के समय आने वाली चुनौतियों का प्रभावी रूप से सामना करने के लिए पूरी तैयारी के साथ कार्य कर रही है।
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सादर, सोनी गुप्ता
Team PWC News
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