कच्चा तेल ₹117 पार, कंपनियों को रोज ₹530 करोड़ का नुकसान, जानें वजह

कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं होने से सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ICRA के अनुसार, पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। LPG पर भी अंडर-रिकवरी जारी है। पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर […] The post कच्चा तेल ₹117 पार, कंपनियों को रोज ₹530 करोड़ का नुकसान, जानें वजह appeared first on Khabar Sansar News.

Sep 25, 2026 - 09:53
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कच्चा तेल ₹117 पार, कंपनियों को रोज ₹530 करोड़ का नुकसान, जानें वजह

कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं होने से सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ICRA के अनुसार, पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। LPG पर भी अंडर-रिकवरी जारी है।

पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर बढ़ा नुकसान

रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को पेट्रोल की बिक्री पर करीब 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इन स्तरों पर सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना करीब 530 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल में तेजी

ICRA के कॉरपोरेट सेक्टर की रेटिंग के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट एवं को-ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ ने रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने और प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। भारत के आयातित कच्चे तेल की बास्केट की कीमत 21 सितंबर, 2026 को बढ़कर 117.4 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि 2025-26 में यह औसतन करीब 66 डॉलर प्रति बैरल थी।

LPG पर सितंबर में करीब ₹300 का नुकसान

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घरेलू LPG सिलेंडर पर करीब 500 रुपये का नुकसान हुआ था, जो सितंबर में घटकर करीब 300 रुपये प्रति सिलेंडर रह गया। 30 जून तक कुल नेगेटिव LPG बफर 61,940 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

OMCs की कमाई और कैश फ्लो पर असर

ICRA के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बाद सिंगापुर का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन 10 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। इसके बावजूद ऊंचे कच्चे तेल और प्रोडक्ट्स के दाम OMCs की प्रॉफिटेबिलिटी और कैश फ्लो पर असर डाल सकते हैं। वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ने से शॉर्ट-टर्म कर्ज भी बढ़ सकता है।

आगे की कमाई किन बातों पर निर्भर करेगी

2026-27 में OMCs की कमाई कच्चे तेल की कीमतों, प्रोडक्ट क्रैक, घरेलू रिटेल कीमतों में बदलाव और LPG अंडर-रिकवरी के लिए सरकार से मिलने वाली मदद पर निर्भर करेगी। 16 सितंबर से डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 20 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 15 रुपये प्रति लीटर थी।

10 प्वाइंट में समझें पूरा मामला

  • OMCs को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये प्रति लीटर नुकसान का अनुमान है।
  • डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर नुकसान हो रहा है।
  • रोजाना करीब 530 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
  • सितंबर में घरेलू LPG पर करीब 300 रुपये प्रति सिलेंडर अंडर-रिकवरी है।
  • पहली तिमाही में LPG पर नुकसान करीब 500 रुपये प्रति सिलेंडर था।
  • 21 सितंबर, 2026 को कच्चे तेल की बास्केट 117.4 डॉलर प्रति बैरल रही।
  • 2025-26 में यह औसतन करीब 66 डॉलर प्रति बैरल थी।
  • 30 जून तक नेगेटिव LPG बफर 61,940 करोड़ रुपये था।
  • 16 सितंबर से डीजल पर 20 रुपये और ATF पर 15 रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी थी।
  • OMCs की 2026-27 की कमाई कई बाजार और सरकारी सहायता संबंधी कारकों पर निर्भर करेगी।

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