चम्पावत: NHM के आउटसोर्स कर्मचारियों को दो माह से मानदेय की कमी पर प्रदर्शन, सीएमओ को ज्ञापन सौंपा

चम्पावत। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों में दो माह से मानदेय न मिलने को लेकर रोष

Dec 30, 2025 - 18:53
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चम्पावत: NHM के आउटसोर्स कर्मचारियों को दो माह से मानदेय की कमी पर प्रदर्शन, सीएमओ को ज्ञापन सौंपा

चम्पावत: NHM के आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन

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कम शब्दों में कहें तो, चम्पावत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के आउटसोर्स कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिसके चलते उन्होंने सीएमओ को ज्ञापन सौंपा है।

चम्पावत। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के बीच सरकार की लापरवाही के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नवंबर और दिसंबर माह का मानदेय अब तक नहीं मिला है। इसके चलते स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संगठन ने रविवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और सीएमओ को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल मानदेय दिलाए जाने की मांग की है।

आंदोलन का उद्देश्य और मांगें

स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संगठन के सदस्यों ने कहा कि यह उनकी बुनियादी आवश्यकता है कि उन्हें समय पर मानदेय मिले। यदि यह समस्या जल्दी हल नहीं होती है, तो संगठन अधिक उग्र आंदोलन करने पर विचार कर सकता है। कर्मचारियों का आरोप है कि विजिलेंट सिक्योरिटी, प्लेसमेंट एवं डिटेक्टिव सर्विस प्रालि. के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को मानदेय नहीं दिया गया है, जो कि बेहद चिंता का विषय है।

सरकारी प्रतिक्रिया की अनुपस्थिति

इन कर्मचारियों की स्थिति को देखते हुए, कई स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इसकी नोटिस ली है। वे मांग कर रहे हैं कि संबंधित विभागों को इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। यदि यह स्थिति आगे बढ़ती है, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, खासकर जब कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पहले से ही तनाव में हैं।

भविष्य की दिशा

उक्त विषय पर यदि सरकार या स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधूरे कार्य और समस्याएं और भी व्यापक हो सकती हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए यह आवश्यक है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को उनकी मेहनत के अनुसार उचित मानदेय समय पर दिया जाए ताकि वे अपनी सेवाएं पूरी ईमानदारी से जारी रख सकें।

सरकारी अधिकारियों पर यह जिम्मेदारी है कि वे मामलों को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द इसका समाधान करें। इस मुद्दे को सुलझाने में देरी से न केवल कर्मचारियों में असंतोष बढ़ेगा, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं को भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

अंत में, हम यह आशा करते हैं कि इन कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द ही समाधान होगा और उन्हें उनकी मेहनत का न्याय मिलेगा।

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सादर, टीम PWC News (सीमा शर्मा)

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