बांग्लादेश की सियासत में नया मोड़: राष्ट्रपति पर जमात प्रमुख का कठोर हमला
बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न आम चुनावों के बाद नई सरकार का गठन हो चुका है और बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। हालांकि सत्ता परिवर्तन के बावजूद देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन द्वारा मोहम्मद यूनुस के […] The post बांग्लादेश की सियासत में नया संग्राम: राष्ट्रपति पर जमात प्रमुख का तीखा हमला appeared first on Khabar Sansar News.
बांग्लादेश की सियासत में नया मोड़: राष्ट्रपति पर जमात प्रमुख का कठोर हमला
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कम शब्दों में कहें तो, बांग्लादेश में हाल ही में आम चुनाव के बाद नई सरकार का गठन हुआ है, और नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने शपथ ली है। राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन और जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान के बीच तीखी नाराजगी सामने आई है।
बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न आम चुनावों के बाद एक नई सरकार का गठन हुआ है, जिसमें बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। हालांकि सत्ता के परिवर्तन के बावजूद देश की राजनीति अभी भी आरोप-प्रत्यारोप के झंझट में है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसकी प्रतिक्रिया में जमात-ए-इस्लामी का भी खुला आक्रामक रुख सामने आया है।
राष्ट्रपति के बयान पर जमात-ए-इस्लामी का पलटवार
जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के बयान को लेकर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट में सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रपति के साथ अन्याय हो रहा था, तो उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता छोड़ने से जुड़े तथ्यों की जानकारी पहले क्यों नहीं दी?
5 अगस्त 2024 को लेकर उठे गंभीर सवाल
शफीकुर रहमान ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ने 5 अगस्त 2024 की घटनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को जनता से छिपाया। उन्होंने कहा कि उस दिन शेख हसीना के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति ने किस प्रकार की बातचीत की और देश को क्या जानकारी मिली, इसके बीच महत्वपूर्ण अंतर है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने अपने राष्ट्र संबोधन में जिन बातों का जिक्र नहीं किया, अब वे क्यों सामने आ रही हैं।
इस्तीफे पर बदला गया राष्ट्रपति का रुख
5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने एक बयान में उनके इस्तीफे को स्वीकार किया था, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि उन्होंने केवल इस्तीफे की खबर सुनी थी और उनके पास इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है। यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति ने इतने समय तक इस तथ्य को स्पष्ट क्यों नहीं किया।
यूनुस प्रशासन पर भी राष्ट्रपति के गंभीर आरोप
राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने इससे पहले मोहम्मद यूनुस पर भी कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस प्रशासन ने बांग्लादेश और अमेरिका के बीच एक गोपनीय समझौता किया, जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले राष्ट्रपति को सूचित करना संवैधानिक जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
बीएनपी और सशस्त्र बलों का मिला समर्थन
राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि राजनीतिक अस्थिरता और प्रदर्शनों के दौरान वह अपने पद पर बने रह सके, इसके पीछे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और सशस्त्र बलों का समर्थन महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने बताया कि बीएनपी के प्रमुख नेताओं ने उन्हें आश्वासन दिया था कि राष्ट्रपति को असंवैधानिक तरीके से हटाने की किसी भी कोशिश का समर्थन नहीं किया जाएगा।
बांग्लादेश की राजनीति में चल रही उठापटक के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या मोड़ आता है और इन विवादों का समाप्ति कैसे होता है। इस तरह की राजनीतिक स्थिरता देश की भलाई के लिए आवश्यक है।
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Team PWC News
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