उत्तराखंड कांग्रेस का चुनावी मंथन, घोषणापत्र को 5 मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित करने की योजना
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने तैयारी तेज कर दी है। पार्टी को...
उत्तराखंड कांग्रेस का चुनावी मंथन, घोषणापत्र को 5 मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित करने की योजना
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - PWC News
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीतियों को परिभाषित करते हुए घोषणापत्र को 5 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित करने का निश्चय किया है। कांग्रेस का उद्देश्य जनता का विश्वास पुनः प्राप्त करना और हर वर्ग को अपने पक्ष में करना है।
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी का मुख्य ध्यान एक प्रभावशाली घोषणापत्र बनाने पर है, जो विभिन्न सामाजिक वर्गों की जरूरतों और आकांक्षाओं को दर्शाए। इस संदर्भ में, कांग्रेस घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य में शासन व्यवस्था काफी कमजोर साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार केवल तकनीकी प्रबंधन में लिप्त है, जबकि समाज की वास्तविक जरूरतों से कट चुकी है।
कापड़ी ने कहा, "सरकार का असली معنی केवल सत्ता में बने रहना नहीं है, बल्कि वह जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।" उनके अनुसार, कांग्रेस का घोषणापत्र उत्तराखंड में एक ऐसी सरकार की पुनर्स्थापना का संकल्प है, जो जनता द्वारा चुनी जाए और उनके प्रति जवाबदेह हो। उन्होंने घोषणापत्र के 5 ऐतिहासिक संकल्प साझा किए हैं:
घोषणापत्र के 5 मुख्य संकल्प
1. सरकार की पुनर्स्थापना: ऐसी सरकार की स्थापना करना, जो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी जाए और जनता की भागीदारी से संचालित हो।
2. जनता की आवाज से बनेगा घोषणापत्र: घोषणापत्र को केवल चुनावी वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि समस्याओं और सुझावों का दस्तावेज बनाया जाएगा, जिसमें सभी वर्गों का योगदान होगा।
3. लोकतांत्रिक जवाबदेही और जनभागीदारी: कांग्रेस सरकार को जनता से किए गए वादों के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा।
4. नेहरूवादी समाजवाद और सार्वजनिक संस्थाओं की पुनर्स्थापना: शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी माना जाएगा।
5. गांधीवादी-सर्वोदयी ग्रामीण विकास मॉडल की पुनर्स्थापना: ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास किया जाएगा, जिसमें स्थानीय संसाधनों और ज्ञान पर आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
घोषणा पत्र समिति के संयोजक डॉ. प्रेम बहुखण्डी ने कहा कि नेहरूवादी समाजवाद को पुनर्स्थापित करना कांग्रेस की मूलभूत नीति होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में सार्वजनिक संस्थानों का कमजोर होना और स्कूलों और अस्पतालों का बन्द होना दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता क्या है।
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने स्थिति पर टिप्पणी की कि उत्तराखंड के निर्माण के लिए लड़ने वालों की मंशा को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए। "अंततः, सवाल यह है कि सरकार कहाँ है?" उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कांग्रेस घोषणा पत्र के निर्माण में जन-आंदोलन का स्वरूप देगी।
पार्टी की अन्य वरिष्ठ नेता सुजाता पॉल ने सामाजिक असंवेदनशीलता के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों के साथ संवाद करना चाहिए। "धरना और प्रदर्शन लोकतंत्र की शक्ति हैं," पॉल ने कहा। कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि उत्तराखंड की जनता केवल पाठक नहीं, बल्कि घोषणापत्र के निर्माण में शामिल होनी चाहिए।
कांग्रेस का मानना है कि समाज के हर वर्ग को जुलाई में आने वाले चुनावों के लिए सीधे अपने सुझाव देने में सक्षम होना चाहिए। यह घोषणापत्र वास्तव में लोगों की आकांक्षाओं, समस्याओं और सुझावों का प्रतीक बनेगा, यही आने वाले कांग्रेस सरकार का राजनीतिक प्रतिबंधित संकल्प होगा।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें.
Team PWC News, प्रियंका शर्मा
What's Your Reaction?