उत्तराखंड: ढोल दमाऊ के साथ लोनिवि कर्मचारियों का सचिवालय कूच, पुलिस ने लगाया बैरिकेड
देहरादून। प्रदेश भर से राजधानी पहुंचे लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर ढोल दमाऊं के साथ
उत्तराखंड: ढोल दमाऊ के साथ लोनिवि कर्मचारियों का सचिवालय कूच, पुलिस ने लगाया बैरिकेड
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सचिवालय की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें सुभाष रोड पर रोक दिया। ये कर्मचारी ढोल दमाऊं के साथ अपनी मांगों के समर्थन में आक्रोशित होकर सड़कों पर उतरे थे।
देहरादून। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सचिवालय पहुंचे लोक निर्माण विभाग के अनेक कर्मचारी, अपने हक के लिए ढोल दमाऊं के साथ एकत्र हुए और जोरदार नारेबाजी करते हुए सचिवालय की दिशा में बढ़ने लगे। इन कर्मचारियों की मुख्य मांगें उन मुद्दों से संबंधित हैं जो लंबे समय से लम्बित हैं। जब ये कर्मचारी सुभाष रोड पर पहुंचे, तो पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया।
रोकने पर कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने वहीं धरना देने का निर्णय लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा है। उनका कहना है कि विभागीय संकट और आर्थिक असमानता की वजह से उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन का उद्देश्य
उत्तरांचल लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रियल संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष ने बताया कि हमारी प्रमुख मांगें हैं कि कर्मचारियों की लंबित भत्तों का भुगतान किया जाए, नियमितीकरण की प्रक्रिया को तेजी दी जाए, और कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन जारी रखेंगे।
पुलिस की प्रतिक्रिया
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड्स का सहारा लिया और कर्मचारियों की भीड़ को शांत करने का प्रयास किया। हालांकि, रोके जाने से नाराज कर्मचारियों ने अपनी आवाज उठाना जारी रखा। उनके धरनास्थल पर सैकड़ों लोग एकत्रित हुए और सोशल मीडिया पर इस घटना की कवरेज करने लगे।
किस तरह के कदम उठाए जाएंगे?
यदि सरकार इस आंदोलन पर ध्यान नहीं देती है, तो कहीं न कहीं यह कर्मचारी संगठन और अन्य संघटनों के बीच एक गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। ऐसा तो नहीं है कि अनेक अन्य विभागों में भी कर्मचारियों की समान समस्याएं हैं, इसलिए सरकार को इस समस्याएं को शीघ्र सुलझाना होगा।
इस घटना से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी अपने हक के लिए संगठित हैं और जरूरत पड़ने पर और भी उग्र प्रदर्शन से नहीं चुकेंगे। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान शीघ्र निकालना चाहिए।
राज्य के विकास में लोक निर्माण विभाग की अहम भूमिका है, ऐसे में कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। अधिक अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.
यह लेख टीम PWC News, साक्षी शर्मा द्वारा लिखा गया है।
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