उत्तराखण्ड के शहरी विकास के लिए नया आधारभूत ढांचा योजना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर उत्तराखण्ड के शहरी क्षेत्रों के समग्र विकास, आधुनिक...

Apr 22, 2026 - 09:53
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उत्तराखण्ड के शहरी विकास के लिए नया आधारभूत ढांचा योजना

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड के शहरी क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार की अर्बन चैलेंज फंड (UCF) योजना बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अंतर्गत, उत्तराखण्ड में शहरी क्षेत्रों का समग्र विकास, आधुनिक आधारभूत ढांचे का निर्माण और नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में इस नई योजना को लागू किया जाएगा।

हाल ही में, राज्य सचिवालय में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में अपर सचिव आवास विनोद गिरी और आवास व शहरी विकास विभाग के उच्च अधिकारी मौजूद थे। बैठक में शहरी विकास निदेशालय ने इस योजना को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए। चार चरणों में नगर निकायों को प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर परियोजनाएं तैयार करने की बात कही गई, जिन्हें केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

यह योजना भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा संचालित की जा रही है, जिसमें देशभर में ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह योजना 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी, और आवश्यकता पड़ने पर तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहरों में बड़े निवेश को आकर्षित करना और उन्हें विकास के नए केंद्रों के रूप में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नगर निकाय इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने के लिए समयबद्ध तरीके से उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव तैयार करें, ताकि राज्य के शहरों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सके।

उत्तराखण्ड को इस योजना में विशेष लाभ इसलिए मिलेगा क्योंकि यहां के सभी 108 नगर निकाय क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना के दायरे में आएंगे, जिससे छोटी नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें भी बैंक ऋण लेकर बड़े विकास कार्य शुरू कर सकेंगी। इस योजना से वित्तीय स्थिति सीमित रखने वाले निकाय भी विकास योजनाओं को गति देने में सक्षम होंगे।

योजना के अंतर्गत, नगर निकायों से तीन प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाएं मांगी गई हैं। पहले क्षेत्र में जल एवं स्वच्छता शामिल है, जिसमें पेयजल आपूर्ति, सीवेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट, वर्षा जल निकासी और कूड़ा निस्तारण के कार्य होंगे। दूसरे क्षेत्र में रचनात्मक पुनर्विकास होगा, जिसमें पुराने शहरी क्षेत्रों, बाजारों, विरासत स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का कायाकल्प किया जाएगा। तीसरे क्षेत्र में सिटीज ऐज ग्रोथ हब्स का विकास होगा, जिसमें शहरों को पर्यटन, शिक्षा, उद्योग और व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजनाएं शामिल होंगी।

योजनाओं की फंडिंग प्रक्रिया चरणबद्ध और प्रदर्शन आधारित रखी जाएगी। स्वीकृति के बाद, केंद्रीय सहायता तीन किस्तों में मिलेगी: पहली किस्त 30%, दूसरी 50% और अंतिम 20%।

इस योजना में सुधारात्मक शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। नगर निकायों को संपत्ति कर सुधार, ऑडिटेड वित्तीय लेखे, डिजिटल नागरिक सेवाएं, GIS आधारित सर्वे, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, जलापूर्ति सुधार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जलवायु अनुकूल शहरी नियोजन जैसे कदम उठाने होंगे।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा है कि सभी नगर निकायों को अपनी प्राथमिक परियोजनाएं शीघ्रता से चिन्हित करने होंगे, Concept Note तैयार करना होगा और समय पर केंद्र सरकार को DPR भेजना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के शहरों को स्वच्छ, सुगम, आधुनिक और निवेश अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

UCF का यह कार्यक्रम उत्तराखण्ड के शहरी विकास के लिए न केवल एक नई योजना है, बल्कि आने वाले वर्षों में शहरी विकास का रोडमैप भी साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह योजना राज्य के शहरों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने इस योजना को अत्यंत महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी बताया, यह सुनिश्चित करते हुए कि राज्य सरकार सभी नगर निकायों को इस योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है।

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Team PWC News - राधिका शर्मा

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