तिलाड़ी विद्रोह की वर्षगांठ पर मज़दूरों का विरोध, सरकार के खिलाफ हल्लाबोल

तिलाड़ी विद्रोह के वर्षगांठ के अवसर पर देहरादून के विभिन्न मज़दूर बस्तियों से आये हुए...

May 31, 2026 - 09:53
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तिलाड़ी विद्रोह की वर्षगांठ पर मज़दूरों का विरोध, सरकार के खिलाफ हल्लाबोल

तिलाड़ी विद्रोह की वर्षगांठ पर मज़दूरों का विरोध, सरकार के खिलाफ हल्लाबोल

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में तिलाड़ी विद्रोह की वर्षगांठ पर मज़दूरों ने सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया। मज़दूर बस्तियों से आए प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि संसद में सरकार उनके अधिकारों का हनन कर रही है।

तिलाड़ी विद्रोह की वर्षगांठ पर देहरादूने के विभिन्न मज़दूर बस्तियों से आए हुए प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर बाबासाहब आंबेडकर की मूर्ति से गांधी पार्क तक एक जुलूस निकाला। इस जुलूस में कांग्रेस, चेतना आंदोलन, सर्वोदय मंडल और अन्य संगठनों के सदस्य शामिल हुए। वक्ताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मलिन बस्ती अधिनियम 2016 पर कार्यवाही नहीं कर रही है, जिसके कारण मज़दूरों, खासकर दिहाड़ी निर्माण मज़दूरों, को अपने हक़ से वंचित किया जा रहा है।

मज़दूरों की आवाज़ और उनकी मांगें

प्रतिभागियों ने इस दौरान कहा कि चुनावों के समय नेताओं द्वारा दिए गए आश्वासनों का कुछ खास असर नहीं होता और बाद में कानूनों की धज्जियां उड़ा दी जाती हैं। यह एक गंभीर समस्या है, जिसके समाधान के लिए अब जनता को कानूनी अधिकार चाहिए।

महंगाई और गैस की किल्लत से जूझ रहे देश भर के मज़दूरों की समस्याएँ ध्यान में रखते हुए, उन्होंने कहा कि निर्माण मज़दूर बोर्ड पंजीकृत यूनियन के प्रमाण पत्रों पर आधारित होने के बजाय वर्तमान में असाधारण शर्तें लागू कर दी गई हैं, जिससे असली मज़दूर अपने अधिकारों से वंचित हैं।

विरोध प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने यह भी कहा कि मंत्री और प्रशासन केवल मालिकों के पक्ष में हैं जबकि मज़दूरों के मान, सम्मान और अधिकारों को अनदेखा किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी उल्लेख किया कि हालिया समय में अनेक गैर-क़ानूनी कार्यों को सरकार बढ़ावा दे रही है और जन आंदोलनों के माध्यम से उन्हें जवाब मिल रहा है। उदहारण के तौर पर, कांठ बांग्ला बस्ती का ज़बरदस्ती विस्थापन और उत्तराखंड उच्च न्यायालय की टिप्पणियां इस बात की पुष्टि करती हैं।

इस दौरान पत्रकार हेम भट्ट की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह दमनात्मक नीति वर्तमान सरकार के असली चरित्र को उजागर करती है।

संविधान के प्रति प्रतिबद्धता

समारोह में तिलाड़ी विद्रोह के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद बाबासाहेब आंबेडकर और महात्मा गांधी की मूर्तियों पर माला डाली गई और संकल्प लिया गया कि संविधान के मूल्यों और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

कार्यक्रम को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय शर्मा, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री सुनीता प्रकाश, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, और अन्य प्रमुख नेताओं ने संबोधित किया। सैकड़ों आम लोगों के साथ कई कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

हालांकि सरकार की इस प्रक्रिया के खिलाफ मज़दूर और अन्य संगठनों की एकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जो भविष्य में उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए सजग रहने का संकेत देती है।

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Team PWC News - स्वाति मेहरा

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