जिनेवा में महत्वपूर्ण वार्ता, खाड़ी में बढ़ती मिसाइलें: क्या आज होगा वैश्विक संघर्ष?
मिडिल ईस्ट एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच आज होने वाली तीसरे और निर्णायक दौर की वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। अगर यह बातचीत असफल रही, तो क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर ईरान […] The post जिनेवा में मीटिंग, खाड़ी में मिसाइलें, क्या आज छिड़ेगा महायुद्ध? appeared first on Khabar Sansar News.
जिनेवा में महत्वपूर्ण वार्ता, खाड़ी में बढ़ती मिसाइलें: क्या आज होगा वैश्विक संघर्ष?
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कम शब्दों में कहें तो, मिडिल ईस्ट एक बार फिर से युद्ध के कगार पर खड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच आज होने वाली तीसरे दौर की वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अगर यह बातचीत असफल रहती है, तो क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका पैदा हो जाएगी। समझा जा रहा है कि ईरान के लिए आज का दिन एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
जिनेवा में होगी निर्णायक बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच यह संवाद स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में ओमान के बीचस्थता से आयोजित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बातचीत में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम, लगाए गए प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दृष्टिपात किया जाएगा। इसमें ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और अमेरिका के विशेष दूत जेरेड कुशनर वार्ता की मेज पर मौजूद रहेंगे।
वार्ता से पहले अमेरिका की ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’
बातचीत शुरू होने से ठीक पहले अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। इसे कूटनीतिक दबाव और संभावित युद्ध की चेतावनी माना जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने किसी भी प्रकार के दबाव में झुकने से मना कर दिया है।
ईरान का बयान: ‘न्यायसंगत समझौते के इरादे से आएंगे’
जिनेवा जाने से पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वे अमेरिका के साथ वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं और इसका उद्देश्य “न्यायपूर्ण और समान समझौता” होगा।
ट्रंप की चेतावनी और जंगी तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अगर वार्ता का परिणाम सकारात्मक नहीं निकलता, तो इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं। इस तरह का बयान सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के रूप में लिया जा रहा है। इस बीच, अमेरिका ने ईरान के चारों ओर अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिसमें अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, अतिरिक्त सैनिक, निगरानी विमान और युद्धपोत शामिल हैं।
ईरान का जवाबी शक्ति प्रदर्शन
वार्ता से पहले, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में रणनीतिक सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। यह जलमार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्से को संभालता है। इसके अलावा, ईरान ने कोरम क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती भी की है।
वैश्विक असर तय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आज की वार्ता बेनतीजा रही, तो इसका प्रभाव केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और विश्व अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। यह अमेरिका-ईरान वार्ता मिडिल ईस्ट के भविष्य की दिशा निर्धारित कर सकती है। समझौता होने की स्थिति में तनाव कम होगा, लेकिन असफलता की स्थिति में दुनिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ सकती है। अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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Team PWC News - प्रियंका शर्मा
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