देहरादून में उल्लास पर्व: सीएम धामी का महत्वपूर्ण योगदान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड के...

Oct 7, 2026 - 09:53
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देहरादून में उल्लास पर्व: सीएम धामी का महत्वपूर्ण योगदान

देहरादून में उल्लास पर्व: सीएम धामी का महत्वपूर्ण योगदान

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में उल्लास पर्व को सफलतापूर्वक मनाया। यह पर्व उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने पर आधारित था, जिसमें उन्होंने नव-साक्षरों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया।

उल्लास पर्व के दौरान, सीएम धामी ने उत्तराखंड के सभी निवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े सभी लोगों की मेहनत का नतीजा है। एक चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह उपलब्धि जिला और राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मिशन साक्षरता और नई शिक्षा नीति

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड का यह स्थान शिक्षा के क्षेत्र में उसकी प्रगति दर्शाता है।

सीएम धामी ने नव-साक्षरों को यह भी बताया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, और शिक्षा व्यक्तिगत और सामाजिक प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा, “साक्षरता अब केवल पढ़ाई-लिखाई नहीं है, बल्कि डिजिटल और वित्तीय साक्षरता, अधिकारों और कर्तव्यों की समझ भी आवश्यक है।” उन्होंने यह बताने में कोई संकोच नहीं किया कि हर शिक्षित व्यक्ति न केवल अपनी जिंदगी में बदलाव लाता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान करता है।

सरकार के प्रयास और योजनाएँ

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए चलाए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नंदा गौरा योजना के तहत पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। एक कदम और आगे बढ़ते हुए, राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम की व्यवस्था की जा रही है। यह कदम दूरदराज के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए है।

प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, और मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के तहत अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। सरकार उच्च शिक्षा में गति लाने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं का विकास करने की दिशा में भी कार्य कर रही है।

शिक्षा मंत्री का समर्थन

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस अवसर पर कहा कि “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की पारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।”

यह पर्व न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड की जाने वाली प्रगति को दर्शाता है, बल्कि यह यह बताता है कि किस प्रकार से राज्य में शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि उत्तराखंड, साक्षरता की दिशा में उठाए गए कदमों के कारण, अब न केवल एक राज्य के रूप में, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत के रूप में उभरा है। आज के शिक्षा के दृश्य में, उत्तराखंड ने एक नई मिसाल कायम की है।

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— दीप्ति कंवर, टीम PWC News

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