फूहड़ सीन और भद्दे आदर्शों पर लगाम लगाता है सेंसर बोर्ड, आज है 75वां जन्मदिन, 12 हजार करोड़ी इंडस्ट्री का है माई-बाप

'सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन' (CBFC) आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहा है। आज ही के दिन 1952 में इस बोर्ड का गठन किया गया था। आइये जानते हैं कैसे काम करता है सेंसर बोर्ड।

Apr 2, 2025 - 20:00
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फूहड़ सीन और भद्दे आदर्शों पर लगाम लगाता है सेंसर बोर्ड, आज है 75वां जन्मदिन, 12 हजार करोड़ी इंडस्ट्री का है माई-बाप

फूहड़ सीन और भद्दे आदर्शों पर लगाम लगाता है सेंसर बोर्ड, आज है 75वां जन्मदिन

सेंसर बोर्ड आज 75 वर्ष का हो गया है, जिसने भारतीय फिल्म उद्योग में गुणवत्ता और नैतिकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह संस्था फूहड़ सीन और भद्दे आदर्शों की रोकथाम के लिए कई कदम उठाती रही है। इस लेख में हम सेंसर बोर्ड की भूमिका, इसके योगदान, और उद्योग पर इसके प्रभाव के बारे में चर्चा करेंगे।

सेंसर बोर्ड का इतिहास और विकास

सेंसर बोर्ड की स्थापना 1951 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य फिल्मों की सामग्री को नियंत्रित करना और भारतीय दर्शकों के लिए उपयुक्त सामग्री की गारंटी करना है। इसे समय-समय पर अद्यतन किया गया है ताकि यह बदलते समाज के मानदंडों और आकांक्षाओं के अनुसार विकसित हो सके। पिछले 75 वर्षों में, इसने कई फिल्में पास की हैं और कुछ को प्रतिबंधित भी किया है, जिससे दर्शकों को जिम्मेदार फिल्में देखने की अनुमति मिल सके।

फूहड़ सामग्री पर नियंत्रण

सेंसर बोर्ड का एक बड़ा कार्य फूहड़ सीन और भद्दे आदर्शों पर लगाम लगाना है। यह सुनिश्चित करता है कि फिल्में केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी दें। सेंसर बोर्ड ने भ्रामक सामग्री की पहचान और विभिन्न फिल्मों में किया गया परिवर्तन दर्शकों की मानसिकता पर सुधार लाने के लिए किया है।

फिल्म उद्योग का वर्तमान परिदृश्य

आज, भारतीय फिल्म उद्योग, जिसे हम 12 हजार करोड़ की इंडस्ट्री के रूप में जानते हैं, अपने विविधतापूर्ण विषयों और कहानियों के चलते पूरे विश्व में पहचान बना रहा है। सेनसर बोर्ड का कार्य इस उद्योग के विकास में योगदान देता है, जिससे फिल्मों की गुणवत्ता बढ़ती है।

फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में समझदारी और संवेदनशीलता महत्वपूर्ण है, और सेंसर बोर्ड ने इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। विभिन्न निर्माता और कला के क्षेत्र में लगे लोग इसके दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं ताकि वे अपनी कला को सही दिशा में ले जा सकें।

निष्कर्ष

इस 75वें जन्मदिन पर, हम सेंसर बोर्ड की सराहना करते हैं और आशा करते हैं कि यह आगे भी भारतीय फिल्म उद्योग को उचित दिशा प्रदान करता रहेगा। दर्शकों को केवल गुणवत्तापूर्ण मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक समृद्धि भी प्राप्त हो सकेगी। फिल्म उद्योग का विकास इस दिशा में महत्वपूर्ण है और सेंसर बोर्ड इसके लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहेगा।

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